scorecardresearch
 

श्रीलंका के लिए PM खोज रहे हैं राष्ट्रपति, नहीं हो रहा कोई तैयार, IMF ने भी कर्ज के लिए रखी नई शर्त

Sri Lanka crisis: श्रीलंका सघन राजनीतिक संकट के दौर से गुजर रहा है. देश में दो दिनों से कोई सरकार नहीं है. राष्ट्रपति गोटाबाया नया पीएम नियुक्त करना चाहते हैं लेकिन विपक्ष का कोई नेता इस परिस्थिति में इस रोल को लेने के लिए तैयार नहीं है. इस बीच IMF ने कर्ज देने के लिए नई शर्त रखी है.

X
कोलंबो में पेट्रोलिंग करती श्रीलंका की सेना (फोटो- पीटीआई) कोलंबो में पेट्रोलिंग करती श्रीलंका की सेना (फोटो- पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • श्रीलंका में दो दिनों से सरकार नहीं
  • नई सरकार बनने पर ही कर्ज देगा IMF
  • नहीं मिल रहा है PM पद का चेहरा

Sri Lanka news: कर्ज...हिंसा...आर्थिक संकट की मार से जूझ रहे श्रीलंका को अब ऐसे राजनीतिक नेतृत्व की तलाश है जो देश के लिए न सिर्फ अभूतपूर्व फैसले ले सके बल्कि चमत्कारिक नतीजे भी दिला सके. श्रीलंका के राष्ट्र्पति पूरी मेहनत से ऐसे स्टेट्समैन की तलाश कर रहे हैं, लेकिन उनकी ये कोशिश कुछ खास रंग नहीं दिखा पा रही है. 

अनिश्चितता के भंवर में फंसे श्रीलंका को बाहर निकालने के लिए कोई भी नेता सामने आता नहीं दिख रहा है. यहां तक कि और मौकों पर पीएम पद की कुर्सी के लिए राजपक्षे सरकार पर तीखे हमले करने वाला विपक्ष भी पीएम पद के लिए कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है.

दरअसल श्रीलंका का संकट इतना गंभीर है कि कोई राजनीतिक दल सत्ता की कमान लेकर अपने हाथ जलाना नहीं चाहता है. क्योंकि जो नेता श्रीलंका का पीएम बनता है अगर वो राज्य की अर्थव्यवस्था को पटरी पर नहीं ला सका तो उसका करियर ही दांव पर लग सकता है. 

अनिश्चितता के इस दौर में बुधवार को राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने देश को संबोधित किया. उन्होंने कहा है कि वे इस सप्ताह एक नया प्रधानमंत्री और एक मंत्रिमंडल नियुक्त करेंगे जो सरकार विरोधी व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच संवैधानिक सुधारों को पेश करेगा. 

नई कैबिनेट में कोई राजपक्षे नहीं होगा

राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे देश में चल रहे प्रदर्शनों से इतने सशंकित है कि उन्होंने कहा है कि वो जो नई कैबिनेट बनाएंगे उसमें कोई राजपक्षे नहीं होगा. उन्होंने प्रदर्शनकारी लोगों का भरोसा जीतते हुए कहा, "मैं बिना किसी राजपक्षे के एक युवा कैबिनेट नियुक्त करूंगा". इसके साथ ही उन्होंने सरकार गठन के लिए विपक्ष से बातचीत शुरू कर दिया है. 

श्रीलंका में दो दिनों से कोई सरकार नहीं

श्रीलंका में राष्ट्रपति गोटाबाया के बड़े भाई और प्रधान मंत्री महिंदा राजपक्षे के इस्तीफा देने के बाद पिछले दो दिनों से कोई सरकार नहीं है, इससे यहां सर्वदलीय अंतरिम सरकार बनाने का रास्ता तैयार हो गया है, बता दें कि राष्ट्रपति को संवैधानिक रूप से बिना कैबिनेट के देश चलाने का अधिकार है. 

संकट इतना गहरा कि कोई नहीं बनना चाहता पीएम

राष्ट्रपति  गोटाबाया नई सरकार बनाना तो चाहते हैं कि लेकिन पीएम बनेगा कौन? वे जिन नेताओं को पीएम पद ऑफर कर रहे हैं वे इस रोल को नहीं लेना चाहते हैं. श्रीलंका की मुख्य विपक्षी पार्टी (Samagi Jana Balawegaya) SJB  के नेता साजिथ प्रेमदासा पीएम पद को स्वीकार करने के लिए अनिच्छुक दिख रहे हैं. वे मौजूदा परिस्थिति में प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहते हैं. साजिथ प्रेमदासा ने कहा है कि वे तभी पीएम बनेंगे जब भ्रष्ट गोटाबाया इस्तीफा दें. लेकिन राष्ट्रपति गोटाबाया ने अपने संबोधन में इस्तीफे का कोई जिक्र नहीं किया है. अब श्रीलंका की सरकारी मशीनरी में गोटाबाया आखिरी राजपक्षे बचे हैं. पीएम रहे महिंदा राजपक्षे इस्तीफा दे चुके हैं. 

एक और विपक्षी नेता हारिन फर्नैन्डो भी पीएम पद स्वीकार नहीं कर रहे हैं. हालांकि उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी किसी भी अंतरिम प्रधानमंत्री को समर्थन करने के लिए तैयार है.

रानिल विक्रमसिंघे से उम्मीदें

इस बीच चर्चा है कि रानिल विक्रमसिंघे को देश के पीएम पद की कमान दी जा सकता है. रानिल विक्रमसिंघे पहले भी श्रीलंका के प्रधानमंत्री रह चुके हैं. उन्होंने बुधवार को राष्ट्रपति गोटाबाया से मुलाकात की थी. लेकिन श्रीलंका की संसद में रानिल विक्रमसिंघे की कोई हैसियत नहीं है. क्योंकि 225 सदस्यों की संसद में रानिल विक्रमसिंघे के पास सिर्फ अपना ही सीट है. बड़ा सवाल है कि वे अपने लिए समर्थन जुटाएंगे कैसे? इसके लिए विपक्षी दलों से बात की जा रही है. 

IMF को नई सरकार का इंतजार

इस बीच कर्ज और भुगतान संकट से जूझ रहे श्रीलंका पर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की लगातार नजर है. IMF ने कहा है कि जैसे ही श्रीलंका में नई सरकार बनती है वो श्रीलंका को आर्थिक मदद पहुंचाने के लिए नीतिगत मसलों पर चर्चा शुरू कर देगा. श्रीलंका में विद्रेशी मुद्रा की इस कदर किल्लत है कि वो अपने जरूरी आयात के लिए भी डॉलर नहीं जुगाड़ कर पा रहा है. श्रीलंका में जब आर्थिक संकट शुरू हुआ था तो वहां का विदेशी मुद्रा भंडार मात्र 50 मिलियन डॉलर रह गया था. इस वजह से श्रीलंका रोजाना की जरूरी चीजें जैसे ईंधन, दवाएं और रसोई गैस भी आयात नहीं कर पा रहा है. 

300 से 600 मिलियन डॉलर देने को तैयार

IMF ने कहा है कि वो इस देश की गतिविधियों पर निगाह बनाए हुए है और वहां पैदा हुए तनाव और जारी हिंसा को लेकर चिंतित है. बता दें कि IMF ने श्रीलंका के साथ अपनी अंतिम मीटिंग में इस देश को 300 से 600 मिलियन डॉलर मदद देने का भरोसा दिया था. 

इधर श्रीलंका के केंद्रीय बैंक के गवर्नर नंदलाल वीरसिंघे ने बुधवार को देश के राजनीतिक दलों को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि देश में राजनीतिक स्थिरता नहीं आता है तो वे अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं. संकट से जूझ रहे श्रीलंका के राजनीतिक दलों के लिए गवर्नर की ये चेतावनी किसी अल्टीमेटम से कम नहीं है.

ये भी पढ़ें

 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें
; ;