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Explainer: 6 दिन के युद्ध से शुरू हुई थी दुश्मनी, 53 साल बाद इजरायल डील से दोस्ती की शुरुआत

मंगलवार को व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में एक ऐसा समझौता हुआ जो इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया. 53 साल बाद अरब के दो अहम देश इजरायल से रिश्ते सामान्य करने पर राजी हुए.

इजरायल अरब का 6 दिनों का भयंकर युद्ध (फोटो-रॉयटर्स) इजरायल अरब का 6 दिनों का भयंकर युद्ध (फोटो-रॉयटर्स)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मध्यपूर्व में बह रही है बदलाव की बयार
  • UAE और बहरीन का इजरायल के साथ समझौता
  • 1697 में 6 दिनों की लड़ाई से बदल गया था इतिहास-भूगोल

मध्य पूर्व में इस वक्त बदलाव की बयार बह रही है. अरब के जिन देशों की इजरायल से कट्टर दुश्मनी थी वो अब एक एक कर इस देश से दोस्ती की गांठ जोड़ रहे हैं.  

कुछ दिन पहले ही संयुक्त अरब अमीरात ने इजरायल से राजनयिक संबंध सामान्य करने की घोषणा की थी, अब बहरीन भी इस कतार में शामिल हो गया है. 

मंगलवार को व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में एक ऐसा समझौता हुआ जो इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया. 53 साल बाद अरब के दो अहम देश इजरायल से रिश्ते सामान्य करने पर राजी हुए. व्हाइट हाउस में इजरायल ने राजनयिक संबंध सामान्य करने के लिए यूएई और बहरीन के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए. 

इस दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्लाह बिन जैयद अल-नहयान और बहरीन के विदेशी मंत्री अब्दुलातीफ बिन रशीद अल जयानी मौजूद थे. 

अरब के चार देशों ने इजरायल से मिलाया हाथ

इस समझौते के साथ ही इजरायल के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने वाले यूएई और बहरीन तीसरे और चौथे देश बन गए. इससे पहले 1979 में मिस्र और 1994 में जॉर्डन ने इजरायल के साथ शांति समझौता किया था. 

इजरायल अरब देशों की परवान चढ़ती दोस्ती क्यों महत्वपूर्ण है ये जानने से पहले इन देशों की दुश्मनी जाननी जरूरी है. 

इजरायल देश का वजूद 1948 में आया. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक जिस जमीन पर इजरायल वजूद में आया वहां से साढ़े सात लाख फिलीस्तिनियों को बेघर होना पड़ा था. अरब के देश इजरायल को मान्यता नहीं दे रहे थे और वे इसे अवैध कब्जा बता रहे थे. 

इजरायल और अरब देशों के बीच तनाव बढ़ता ही जा रहा था. आखिरकार 5 जून 1967 को इजरायल और अरब देशों के बीच खुले रूप से युद्ध का ऐलान हो गया. 

इस युद्ध में इजरायल एक तरफ था, जबकि मिस्र, जॉर्डन,  इराक, कुवैत, सीरिया, सऊदी अरब, सूडान और अल्जीरिया एक तरफ थे. 

इजरायल पर हमला करने के लिए अरब देशों ने जॉर्डन में अपना ठिकाना बनाया था. अरब देश इजरायल पर हमले की योजना ही बना रहे थे कि इजरायल उनकी योजना भांप गया. 

3 घंटे में 300 लड़ाकू विमान स्वाहा

 5 जून 1967 को इजरायली एयरफोर्स ने काहिरा के नजदीक और स्वेज के रेगिस्तान में स्थित मिस्र के हवाई सैन्य अड्डों पर बमों की बौछार कर दी. इस हमले ने मिस्र की कमर तोड़ कर रख थी. इजरायली वायुसेना ने 3 घंटे में मिस्र के करीब 300 लड़ाकू विमानों को ध्वस्त कर दिया. इस हमले की सूचना मिलते ही पूरी दुनिया में कोहराम मच गया. 

अरब देशों ने ताबड़तोड़ अपनी सेनाओं को इजरायल की सीमा पर भेजना शुरू कर दिया, लेकिन इजरायल तबतक लीड ले चुका था. इजरायली वायुसेना ने काहिरा में एयरपोर्ट पर कई जगह बम बरसाए. मिस्र में आपातकाल की घोषणा कर दी गई. जॉर्डन भी मिस्र के कदम पर चला वहां पर मार्शल लॉ लगा दिया और मिस्र के समर्थन में आ गया. इसके बाद रेडियो सीरिया में भी खबर चली कि इजरायल ने उनपर हमला कर दिया है. सीरिया ने अपनी सेना को मिस्र के समर्थन में भेज दिया. 

अब तक सीरिया के साथ साथ इस युद्ध में इराक, कुवैत, सूडान अल्जीरिया, यमन और फिर सऊदी अरब भी कूद पड़े. 

जेरुशलम इस हमले का केंद्र रहा. यहां पर इजरायल और जॉर्डन में आमने-सामने की झड़प हुई. सीरियाई विमानों ने समुद्र तट के किनारे बसे शहर हैफा को निशाना बनाया जबकि इजरायल ने दमिश्क एयरपोर्ट पर हमला किया.

इस मुद्दे को सुलझाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक हुई. अमेरिका ने तुरंत सभी पक्षों को लड़ाई रोकने को कहा. 

अरब देशों के 20 हजार सैनिकों ने गंवाई थी जान

लेकिन इस लड़ाई में इजरायल ने गजब का पराक्रम दिखाया. उसकी फौजों ने न केवल इन देशों को शिकस्त दी बल्कि गाजा पट्टी को भी अपने कब्जे में कर लिया. आखिरकार 11 जून 1967 को ये युद्ध समाप्त हो गया. छह दिन चले इस युद्ध में एक हजार से ज्यादा सैनिक मारे गए वहीं अरब देशों के लगभग 20 हजार सैनिकों को जान गंवानी पड़ी. 

इस युद्ध ने इजरायल और अरब देशों के बीच दुश्मनी की एक ऐसी दीवार खड़ी कर दी जो आजतक कायम है. इस युद्ध का नतीजा ये रहा कि इजरायल ने मिस्र से गाजा पट्टी और सिनाई प्रायद्वीप, जॉर्डन से वेस्ट बैंक और पूर्वी येरुशलेम और सीरिया से गोलन की पहाड़ियों पर अपना अधिकार जमा लिया. सिनाई प्रायद्वीप तो मिस्र को मिल चुका है, जबकि वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी का ज्यादातर भूभाग इजरायल के कब्जे में है. यही वो क्षेत्र है जहां फिलस्तीन राष्ट्र बनाने की मांग लगातार उठती रहती है. 

मिस्र और जॉर्डन इस अतीत को भूला चुके हैं, अब बारी अरब देशों की है. इसी सिलसिले में UAE और बहरीन इजरायल से शांति समझौता कर रहे हैं. दीगर है कि ये दोनों देश प्रत्यक्ष रूप से इस युद्ध में शामिल नहीं हुए थे, लेकिन इजरायल से इनकी कटुता थी. 

 

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