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स्कॉटलैंड की 'आजादी' की योजना को झटका, जनमत संग्रह के लिए ब्रिटेन संसद की मंजूरी जरूरी

स्कॉटलैंड की प्रधानमंत्री निकोला स्टर्जन ने अगले साल 19 अक्टूबर को जनमत संग्रह कराने का प्रस्ताव रखा था. यह ब्रिटेन से स्कॉटलैंड के अलग होने को लेकर दूसरा जनमत संग्रह है. इससे पहले सितंबर 2014 में भी इसी तरह का जनमत संग्रह किया जा चुका है. उस समय लगभग 55 फीसदी लोगों ने ब्रिटेन के साथ बने रहने को लेकर वोट किया था.

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सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

स्कॉटलैंड सरकार को बुधवार को ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने कहा है कि ब्रिटिश संसद की मंजूरी के बिना स्कॉटलैंड को जनमत संग्रह (Referendum) कराने का अधिकार नहीं है. दरअसल ब्रिटेन से स्कॉटलैंड के अलग होने को लेकर वहां की सरकार जनमत संग्रह कराने जा रही थी. स्कॉटलैंड सरकार की अगले साल अक्टूबर में जनमत संग्रह कराने की योजना थी.

स्कॉटलैंड की प्रधानमंत्री निकोला स्टर्जन ने अगले साल 19 अक्टूबर को जनमत संग्रह कराने का प्रस्ताव रखा था. यह ब्रिटेन से स्कॉटलैंड के अलग होने को लेकर दूसरा जनमत संग्रह है. इससे पहले सितंबर 2014 में भी इसी तरह  का जनमत संग्रह किया जा चुका है. उस समय लगभग 55 फीसदी लोगों ने ब्रिटेन के साथ बने रहने को लेकर वोट किया था. 

स्टर्जन की स्कॉटिश नेशनल पार्टी (एसएनपी) ने स्कॉटलैंड की आजादी का हवाला देकर दूसरे जनमत संग्रह की मांग की थी क्योंकि 2016 में खुद ब्रिटेन ने यूरोपीय यूनियन (ईयू) से ब्रिटेन के अलग होने के हक में वोट किया था. 

इस फैसले पर स्टर्जन ने कहा कि वह इससे निराश हैं लेकिन वह फैसले का सम्मान करेंगी. उन्होंने ट्वीट कर कहा, ऐसा कानून जो वेस्टमिंस्टर की सहमति के बिना स्कॉटलैंड को उसके भविष्य का फैसला करने की अनुमति नहीं देता. वह स्वैच्छिक साझेदारी के रूप में ब्रिटेन की किसी भी धारणा को मिथक के रूप में उजागर करता है.

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