scorecardresearch
 

कौन है सऊदी अरब की ये महिला जिसके भारतीय हुए मुरीद

नौफ मरवाई सऊदी अरब की पहली प्रमाणित योग इंस्ट्रक्टर बन गई हैं. सऊदी में योग को पहचान दिलाने के लिए उन्हें 2018 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से भारत का चौथा सबसे सर्वोच्च सम्मान पद्मश्री भी मिल चुका है. नौफ दो दशक पहले तक सऊदी अरब की एकमात्र योग शिक्षिका थीं. उन्होंने 2004 में पहली बार योग को लेकर सार्वजनिक रूप से बात की थी. वह हजारों लोगों और कई योग शिक्षिकाओं को प्रशिक्षित भी कर चुकी हैं. 

X
नौफ मरवाई नौफ मरवाई
स्टोरी हाइलाइट्स
  • नौफ मरवाई ने सऊदी अरब में योग को कानूनी मान्यता दिलाई
  • सऊदी अरब की पहली प्रमाणित योग इंस्ट्रक्टर बनीं

इस्लामिक देश सऊदी अरब में योग को लोकप्रिय बनाने वालीं नौफ मरवाई अक्सर सुर्खियों में रहती हैं. रक्षाबंधन के मौके पर भारतीय सोशल मीडिया पर नौफ मरवाई को बहन बताते हुए उन्हें पर्व की शुभकामनाएं दे रहे हैं. कई भारतीय यूजर्स ने मरवाई की जमकर तारीफ की है और उन्हें प्रेरणास्रोत बताया है. नौफ मरवाई सऊदी अरब की नागरिक हैं और वह देश की पहली सर्टिफाइड योग इंस्ट्रक्टर हैं. सऊदी में योग को पहचान दिलाने के लिए उन्हें 2018 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से भारत का चौथा सबसे सर्वोच्च सम्मान पद्मश्री भी मिल चुका है.

नौफ के लिए सऊदी अरब में योग को कानूनी मान्यता दिलाना बिल्कुल भी आसान नहीं था. उन्हें सऊदी अरब के कट्टरपंथियों के विरोध का भी सामना करना पड़ा. नौफ ने तमाम चुनौतियों का सामना करते हुए योग को सऊदी अरब के घर-घर तक पहुंचाने की कोशिश की.

सोशल मीडिया पर नौफ को रक्षाबंधन की ढेर सारी शुभकामनाएं मिलीं और उन्होंने सभी को जवाब भी दिया. एक भारतीय यूजर्स ने लिखा, "नौफ की जिंदगी और उनका योगिनी बनना बहुत ही प्रेरणादायक है, ये एक चमत्कार है."

सऊदी अरब में योग को कानूनी मान्यता दिलाने का संघर्ष

वहीं, एक अन्य भारतीय यूजर ने ट्वीट किया, अरब दुनिया और भारत के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान लंबे समय से चला आ रहा है और नौफ मरवाई इस विरासत को सफलतापूर्वक आगे ले जा रही हैं. भारत से उन्हें शुभकामनाएं.

यूएई के स्थानीय निवासी और सोशल मीडिया पर सक्रिय हसन सजवानी ने ट्वीट कर कहा, भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से पद्म श्री सम्मान पा चुकीं सऊदी महिला नौफ मरवाई से मिलिए. नौफ सऊदी अऱब की पहली प्रमाणित योग इंस्ट्रक्टर हैं. उन्होंने सऊदी अरब में योग को कानूनी मान्यता दिलाने में अहम भूमिका निभाई है.

सऊदी अरब में भारत के राजदूत रह चुके नवदीप सूरी ने नौफ की सराहना करते हुए कहा कि मुझे 2019 में अबू धाबी में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर नौफ मरवाई से मिलने का मौका मिला था. वह युवाओं के लिए प्रेरणा हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, नौफ दो दशक पहले तक सऊदी अरब की एकमात्र योग शिक्षिका थीं. उन्होंने 2004 में पहली बार योग को लेकर सार्वजनिक रूप से बात की थी. हजारों लोगों और कई योग शिक्षिकाओं को प्रशिक्षित किया. 

नौफ ने 2006 में योग को कानूनी मान्यता देने के लिए प्रशासन से संपर्क किया था लेकिन इसका कोई खास लाभ नहीं हुआ. 

वह कहती हैं कि 2015 में बदलाव आना शुरू हुआ. हालांकि, उस समय कुछ चरमपंथी महिलाओं के स्पोर्ट्स खेलने और योग करने के खिलाफ थे. यह वही समय था, जब संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था.

उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया, मुझे शुरुआत में कई चुनौतियां का सामना करना पड़ा. शुरुआत में लोग यह भी पूछते थे कि क्या योग बौद्ध धर्म से जुड़ा हुआ है. उस समय कुछ चरमपंथी विचारधारा से जुड़े लोग योग का विरोध कर रहे थे. 

वह बताती हैं कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के ऐलान के बाद हमें हर साल योग दिवस पर कार्यक्रमों का आयोजन करने से एक्सपोजर मिला और योग का प्रचार भी हुआ. तभी कॉन्सुलेट जनरल ऑफ इंडिया ने हमारे अरब योग फाउंडेशन (Arab Yoga Foundation) के कई अन्य योग कार्यक्रमों का समर्थन करना शुरू किया.

नौफ ने बताया कि फरवरी 2017 में चीजें उस समय और सुधरीं, जब मैंने प्रिंसेज रीमा बिंट अल सऊद से मुलाकात की. वह उस समय सऊदी अरब की स्पोर्ट्स अथॉरिटी फॉर प्लानिंग एंड डेवलपमेंट की उपाध्यक्ष थीं. जून 2017 में जनरल स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ सऊदी अरब ने हमारे योग दिवस कार्यक्रमों का समर्थन किया. उस समय योग के लिए उमड़ी भारी भीड़ को लेकर प्रशासन हैरान रह गया था. इस तरह योग को सऊदी समाज में लोकप्रियता मिलनी शुरू हुई.

योग और धर्म को लेकर मिथक

नौफ कहती हैं कि सिर्फ इस्लाम नहीं बल्कि आमतौर पर योग और धर्म को लेकर लोगों में भ्रांतियां हैं. सभी खेलों की शुरुआत किसी विशेष समय और स्थान पर हुई. योग का धर्म से कोई लेना देना नहीं है. योग दरअसल वैदिक फिलोसॉफी से जुड़ा हुआ है. इसका सीधा संबंध स्वास्थ्य से है. यह एक तरह से सांस्कृतकि आदान-प्रदान है.

उन्होंने बताया कि कोविड-19 के मद्देनजर लगाए गए लॉकडाउन के दौरान योग ने लोगों की बहुत मदद की. योग के लिए किसी तरह के उपकरण की जरूरत नही हैं. यह शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की बीमारियों का इलाज है. 

2008 में भारत आई थीं

भारत के साथ जुड़ाव के बारे में वह कहती हैं, मैं योग सीखने के लिए पहली बार 2008 में भारत आई थी. मैंने 10 सालों तक योग सीखा. मैं ल्यूपस  (Lupus) से ग्रसित थी इसलिए भारत की मेरी यह यात्रा अहम थी. मैंने भारत जाकर योग और आयुर्वेद सीखा. इसके बाद मैं बार-बार भारत जाती रही. मैं भारत और सऊदी अरब के बीच लगभग 12 सालों तक रही. भारत में मेरे कई दोस्त बने. मैंने आयुष मंत्रालय के साथ मिलकर भी कई परियोजनाओं पर काम किया है.

योग को लेकर सऊदी अरब सरकार की प्रतिक्रिया के बारे में वह कहती हैं कि मेरा मकसद सऊदी अरब में योग को प्रमोट करना था. सऊदी सरकार के विजन 2030 (Vision 2030) की वजह से प्रशासन से भरपूर समर्थन मिला. सऊदी के लोगों में योग काफी लोकप्रिय है. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुरीद

नौफ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से काफी प्रभावित हैं. वह कहती हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शख्सियत औऱ उनकी विदेश नीति बहुत ही प्रभावी है. योग दिवस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए उनके अथक प्रयासों की वजह से मैं उनके बारे में जान पाई. मैं हैरान हूं कि सऊदी अरब में कई योगी और लोग उन्हें जानते हैं और उनके काम से वाकिफ हैं.

वह कहती हैं कि नरेंद्र मोदी के प्रयासों का ही नतीजा है कि भारत और भारत की सरकार को समझने का मिडिल ईस्ट का नजरिया बदला है. 2018 में भारत के राष्ट्रपति से सम्मान मिलने के बाद हुए फोटो सेशन के बाद मैं उनसे मिली थीं. वह सम्मानित हुए लोगों से मिल रहे थे और मैं ठीक उनके पीछे इंतजार कर रही थीं. उन्होंने मेरे काम के लिए मुझे सराहा भी.

ये भी पढ़ें

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें