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व्लादिमीर पुतिन ने एडवर्ड स्नोडेन को दी रूस की नागरिकता, अमेरिका ने घोषित कर रखा है भगोड़ा

अमेरिका ने जिस एडवर्ड स्नोडेन को भगोड़ा घोषित कर रखा है. उसे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रूसी नागरिकता दे दी है. यूक्रेन और रूस के बीच जारी जंग के बीच पुतिन का ये कदम काफी अहम माना जा रहा है. बता दें कि स्नोडेन 2013 में अमेरिका से भागने के बाद रूस के मास्को में रह रहे हैं.

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एडवर्ड स्नोडेन (File Photo)
एडवर्ड स्नोडेन (File Photo)

रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ऐसा कदम उठाया है, जिससे अमेरिका को खासी नाराजगी हो सकती है. अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के खुफिया राज सार्वजनिक करने वाले पूर्व कांट्रेक्टर एडवर्ड स्नोडेन को पुतिन ने रूस की नागरिकता दे दी है. 

एडवर्ड स्नोडेन (39) इस वक्त रूस की राजधानी मास्को में रह रहे हैं. अमेरिका से फरार होने के बाद स्नोडेन 2013 में रूस पहुंचे थे. स्नोडेन ने 2020 में रूस की नागरिकता के लिए आवेदन दिया था. 

उस समय स्नोडेन ने ट्वीट किया था कि माता-पिता से अलग होने के बाद उन्हें अब अपनी पत्नी और बेटे से अलग होने की इच्छा बिल्कुल भी नहीं है. इसलिए वे अमेरिकी नागरिकता के साथ ही रूस की दोहरी नागरिकता के लिए आवेदन कर रहे हैं. 

एडवर्ड स्नोडेन मास्को में अपनी प्रोफाइल को काफी छुपाकर रखते हैं. हालांकि, कभी-कभी वह सोशल मीडिया पर अपने परिवार की तस्वीरें पोस्ट करते रहते हैं. स्नोडेन ने 2019 में कहा था कि अगर अमेरिका निष्पक्ष सुनवाई की गारंटी देता है तो वह अपने देश लौटने को तैयार हैं.

कौन हैं एडवर्ड स्नोडेन?

अपने खुलासों से सबको चौंकाने वाले एडवर्ड स्नोडेन मास्को में रहते हैं. वो अमेरिकी एनएसए के लिए काम कर चुके हैं. फेमस कंप्‍यूटर प्रोफेशनल स्नोडेन को एनएसए संबंधित गुप्त जानकारी लीक करने के आरोपों के बीच अमरीका से पलायन कर गए थे. उन्हें अमेरिका ने भगोड़ा घोषित किया हुआ है. मीडिया की खबरों के अनुसार साल 2010 में स्नोडेन भारत पहुंचे और नई दिल्ली में हैकिंग की आधुनिक तकनीकी सीखी थी.

आधार पर भी उठा चुके हैं सवाल

एडवर्ड स्नोडेन ने जनवरी 2018 में आधार के डेटा के गलत तरीके से इस्तेमाल होने की आशंका व्यक्त की थी. उन्होंने अपने एक ट्वीट में कहा था कि भारत में आधार का गलत इस्तेमाल हो सकता है. दरअसल, उस समय आधार का डेटाबेस लीक होने का मामला सामने आया था, जिसके बाद इसकी सुरक्षा पर सवाल उठे थे. UIDAI ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया था, लेकिन एक दिन बाद ही अमेरिकी व्हिसिल ब्लोअर एडवर्ड स्नोडेन ने UIDAI के दावों के बिलकुल उलट बात कहकर सबको चौंका दिया था.

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