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रूसी तेल पर प्राइस कैप लगाने की तैयारी में पश्चिमी देश, पुतिन ने दिया यह बड़ा बयान

पश्चिमी देशों की ओर से रूसी तेल पर लगाए जा रहे प्राइस कैप पर व्लादिमीर पुतिन ने चेतावनी दी है. राष्ट्रपति पुतिन ने सख्त लहजे में कहा है कि तेल पर प्राइस कैप लगाने की वजह से ऊर्जा बाजार के लिए गंभीर परिणाम हो सकते हैं. जी-20 और यूरोपीय यूनियन जल्द ही रूसी तेल पर प्राइस कैप की घोषणा कर सकता है.

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (फोटोः रायटर्स)
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (फोटोः रायटर्स)

अमेरिका समेत अन्य पश्चिमी देश जल्द ही रूसी तेल पर प्राइस कैप लगाने का ऐलान करने जा रहे हैं. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट की मानें तो रूसी तेल की कीमत 65 से 70 डॉलर प्रति बैरल के बीच तय की जा सकती है. इन्हीं खबरों के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्राइस कैप को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. गुरुवार को पुतिन ने कहा कि जी-20 और यूरोपीय यूनियन के प्राइस कैप का ऊर्जा बाजार पर गंभीर असर हो सकता है.

गौरतलब है कि रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने यह बातें इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल सुदानी से फोन पर बातचीत के दौरान कहीं. इससे पहले मंगलवार को अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने कहा था कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश रूसी तेल पर प्राइस कैप लागू करने के अंतिम चरण में हैं. वित्त मंत्रालय की ओर से कहा गया था कि प्राइस कैप की मंजूरी मिलते ही अगले कुछ दिनों में इसे लागू कर दिया जाएगा. 

प्राइस कैप बाजार के सिद्धांत के खिलाफः पुतिन 
इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल- सुदानी से बातचीत के दौरान रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि रूसी तेल पर पश्चिमी देशों की ओर से लाया गया प्राइस कैप बाजार के सिद्धांतों के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर गंभीर असर हो सकता है. 

क्या है प्राइस कैप?
यूक्रेन के साथ युद्ध के कारण रूस कई आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर रहा है. इसमें से अधिकतर प्रतिबंध अमेरिका समेत पश्चिमी देशों ने लगाए हैं. प्राइस कैप इसी आर्थिक प्रतिबंध का हिस्सा है. इसके तहत पांच दिसंबर से रूसी तेल की कीमत का निर्धारण जी-20 और यूरोपीय यूनियन करेंगे. अभी रूस अपनी कीमतों पर तेल बेच रहा है. 

प्राइस कैप क्यों?
प्राइस कैप का मुख्य उद्देश्य रूस की आय को कम करना है. पश्चिम की ओर से रूस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध का शुरू से ही मकसद रूस की आय के स्त्रोत को कम करना है ताकि यूक्रेन से युद्ध में इस्तेमाल किए जा रहे रूसी फंड में कमी आए. 

सूत्रों के अनुसार, यूरोपीय यूनियन रूसी कच्चे तेल की कीमत 65 डॉलर से 70 डॉलर प्रति बैरल के बीच कैपिंग पर विचार कर रहा है. यानी रूस इससे सस्ता या महंगा तेल नहीं बेच पाएगा. प्राइस कैप के लागू हो जाने के बाद अगर कोई भी कंपनियां इसके अनुकूल तेल नहीं खरीदती हैं तो उस तेल के लिए कंपनियों को शिपिंग, बीमा और वित्तीय सहायता नहीं दी जाएगी.
 

भारत पर क्या होगा असर
प्राइस कैप को लेकर पूछे गए सवाल पर भारत के केंद्रीय पेट्रोलियम एवं नेचुरल गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि हम किसी भी तरह से चिंतित नहीं है. जब प्राइस कैप लागू होगा देखा जाएगा. उन्होंने यह भी कहा था कि हम इसको लेकर किसी तरह के दबाव या तनाव में नहीं हैं. 

ऐसे में अगर प्राइस कैप 65 से 70 डॉलर प्रति बैरल रहता है. जैसा कि संभावनाएं जताई जा रही हैं तो इसका ज्यादा असर भारत पर नहीं पड़ेगा. दरअसल, पहले ही भारत इसी दाम के आसपास रूस से तेल खरीद रहा है. इसलिए प्राइस कैप के बाद भी तेल सप्लाई पर ज्यादा असर नहीं पड़ने की संभावनाएं हैं. हालांकि अगर प्राइस कैप थोड़ा आगे पीछे रहा तो उसका असर जरूर भारत और चीन जैसे तेल आयातकर्ताओं पर देखने को मिल सकता है. 

 

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