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CPEC में तीसरे देश को लेकर भारत ने जताई आपत्ति, पाकिस्तान भड़का

सीपीईसी में तीसरे देश के रूप में अफगानिस्तान को शामिल करने की चीन, पाकिस्तान के प्रयासों पर भारत ने एतराज जताया था. भारत ने कहा था कि सीपीईसी में तीसरे देश के रूप में किसी को शामिल करना प्रत्यक्ष रूप से भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन है. 

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सीपीईसी में तीसरे देश को शामिल करने का भारत ने जताया विरोध
  • सीपीईसी में अफगानिस्तान को शामिल करने की चीन, पाक की मंशा

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजर रही अरबों डॉलर की चीन, पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) परियोजना को लेकर भारत के बयान के बाद पाकिस्तान तिलमिला गया है. सीपीईसी पर भारत के बयान को पाकिस्तान ने आधारहीन और भ्रामक बताकर खारिज किया है. चीन और पाकिस्तान ने सीपीईसी में तीसरे देश के रूप में अफगानिस्तान को शामिल करने की इच्छा जताई थी, जिसका भारत ने कड़ा विरोध किया था. 

पाकिस्तान का कहना है कि भारत ने सीपीईसी मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की है. 

पाकिस्तान के विदेश विभाग के प्रवक्ता ने जारी बयान में कहा कि सीपीईसी एक परिवर्तनकारी (ट्रांसफॉर्मेशनल) परियोजना है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में स्थिरता लाना और आपसी सहयोग बढ़ाना है.

उन्होंने कहा कि सीपीईसी में चीन के निवेश से ही पाकिस्तान की ऊर्जा और इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी बाधाएं दूर होने में मदद मिली.

बयान में कहा गया कि सीपीईसी को लेकर भारत का हालिया बयान उसकी असुरक्षा की भावना और उसके वर्चस्ववादी एजेंडे को दर्शाता है, जिसकी वजह से कई दशकों से दक्षिण एशिया का सामाजिक आर्थिक विकास बाधित रहा है.

सीपीईसी में तीसरे देश को शामिल करने की संभावनाओं को लेकर भारत के बयान को खारिज करते हुए पाकिस्तान ने आरोप लगाया कि वास्तव में भारत लगभग सात दशकों से जम्मू कश्मीर पर अवैध रूप से कब्जा किए हुए है.

चीन और पाकिस्तान का कहना है कि आपसी सहयोग के लिए सीपीईसी एक खुला और समावेशी प्लेटफॉर्म है. भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने मंगलवार को कहा था कि सीपीईसी में तीसरे देश के रूप में किसी को शामिल करना प्रत्यक्ष रूप से भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन है. 

दरअसल भारत तथाकथित सीपीईसी की परियोजनाओं का लगातार विरोध करता रहा है. भारत का कहना है कि सीपीईसी परियोजना भारतीय क्षेत्र में है, जिस पर पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जा किया हुआ है. इस तरह की गतिविधियां अवैध, गैरकानूनी और अस्वीकार्य है. 

सीपीईसी चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना बेल्ट एंड रोड (Belt And Road) का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य दक्षिण पूर्व एशिया के तटीय देशों के साथ उसके ऐतिहासिक व्यापारिक मार्गों में फिर से जान फूंकना है.

चीन ने 46 अरब डॉलर की इस परियोजना का ऐलान 2015 में किया था. इस परियोजना के पीछे चीन का उद्देश्य क्षेत्र में अमेरिका और भारत के बढ़ रहे प्रभावों का कम कर अपने प्रभाव को बढ़ाना है. सीपीईसी के जरिए पाकिस्तान के बलूचिस्तान स्थित ग्वादर बंदरगाह को चीन के शिनजियांग प्रांत से जोड़ा जाएगा.

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