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'काबुल में धमाके के पीछे पाकिस्तान का हाथ', अफगानिस्तान के सीआईडी अफसर ने लगाए आरोप

अफगानिस्तान में लगातार हो रहे बम धमाकों से हुकूमत कर रही तालिबान सरकार के माथे पर बल पड़ने लगे हैं. इन धमाकों के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई पर शक जताया जा रहा है लेकिन अभी तक पुख्ता तौर पर अफगानिस्तान के हाथ कोई सबूत नहीं लग सका है.

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काबुल की मस्जिद में हुए धमाके में अब तक 21 लोगों की हो चुकी मौत (फोटो-एपी)
काबुल की मस्जिद में हुए धमाके में अब तक 21 लोगों की हो चुकी मौत (फोटो-एपी)

काबुल के कोतल-ए-खैरखाना के पास बनी मस्जिद में 17 अगस्त की शाम जोर धमाका हुआ था. इस ब्लास्ट में कम से कम 21 लोगों की जान चली गई जबकि 40 लोग जख्मी हो गए. काबुल में 15 दिन के भीतर तीन बड़े धमाके हो चुके हैं.

काबुल की मस्जिद में हुए इस हमले की जांच में शामिल अफगानिस्तान सीआईडी के एक अफसर ने आजतक से कहा कि इस हमले के पीछे पाकिस्तान का हाथ है. उन्होंने कहा कि जल्द ही हमलावर को ढूंढ लिया जाएगा. हालांकि अभी तक इस हमले की किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली है.

माना जा रहा है कि पाकिस्तान की शह पर आतंकी संगठन तालिबान की सरकार को उखाड़ फेकना चाहते हैं. बहरहाल अफगानिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ वहां की खुफिया एजेंसियों ने पूरे देश में ताबड़तोड़ छापामारी शुरू कर दी है. हालांकि इस्लामिक अमीरात के प्रवक्ता जबीबुल्ला मुजाहिद के मुताबिक इस तरह का अपराध करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. गुनहगार जल्दी ही पकड़े जाएंगे और उन्हें सजा दी जाएगी.

पिछले धमाकों की आईएस ने ली थी जिम्मेदारी

- 5 अगस्त को काबुल में दो बड़े ब्लास्ट हुए थे. इनमें से एक विस्फोट हज़ारा मस्जिद में हुआ था, जिसमें कम से कम 8 लोगों की मौत हुई थी. इस्लामिक स्टेट (IS) हमले की जिम्मेदारी ली थी. हमले में हज़ारा और शिया लोगों को निशाना बनाया गया है. इसके अलावा एक विस्फोट इमाम मोहम्मद बाकेर पर हुआ था, जो काबुल के सर-ए-करीज़ इलाके में स्थित जनाना मस्जिद है. जिस इलाके में विस्फोट हुआ है वह एक रिहाइशी इलाका है. यहां की मुख्य आबादी शिया मुसलमान है. 

- काबुल के शाश दराक इलाके की एक मदरसे में 11 अगस्त को लोग नमाज के लिए इकट्ठा हुए थे. नमाज खत्म होने के बाद लोग मदरसे से बाहर निकल रहे थे तभी मदरसे के गेट के पास एक जोरदार धमाका हो गया था. यह फिदायील हमला था. यह धमाका इतनी जोरदार था कि कई लोगों के चीथड़े तक उड़ गए थे. इन्हें इंसानी मांस के टुकड़ों पर एक सिर मिला था, जो तालिबानी नेता रहीमुल्ला हक्कानी का था.

धमाके के बाद अरबी भाषा में लिखी एक चिट्ठी सामने आई थी. यह चिट्ठी इस्लामिक स्टेट के खुरासान प्राविंस की तरफ से भेजी गई थी. इसमें दावा किया गया था कि तालिबान सरकार के सबसे काबिल नेता को उनके ही एक फिदाइन खालिद अल लोगारी ने मारा है. 15 अगस्त को भी एक धमाका हुआ था, जिसकी जिम्मेदारी आईएस ले थी.

अभी तक शिया आबादी में हो रहे थे धमाके

तालिबान में बीते कुछ महीनों में बम धमाकों की कई वारदातें तेज हो गई हैं. अब तक शिया मस्जिदों को आतंकी संगठन आईएस द्वारा निशाना बनाया जा रहा था, लेकिन इस बार काबुल की जिस मस्जिद में ब्लास्ट हुआ है, वहां शिया आबादी नहीं रहती है.
तालिबान गुरुद्वारों को भी निशाना बना चुके हैं.
 

 

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