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'भारत-पाकिस्तान के बीच अफगानिस्तान में छिड़ेगी जंग'

भारत और पाकिस्तान के बीच अब अफगानिस्तान की सरजमीं पर छिड़ेगी लड़ाई. ऐसा कहना है अमेरिका के पूर्व राजनयिक रॉबर्ट ब्लैकविल का.

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भारत और पाकिस्तान के बीच अब अफगानिस्तान की सरजमीं पर छिड़ेगी लड़ाई...ऐसा कहना है अमेरिका के पूर्व राजनयिक रॉबर्ट ब्लैकविल का.

अमेरिका के पूर्व राजदूत ने कहा है कि भारत के प्रति पाकिस्तान की सेना की नीति और रुख में जरा भी बदलाव नहीं आया है और दोनों देशों के बीच संघर्ष का अगला क्षेत्र अफगानिस्तान हो सकता है.

भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत रॉबर्ट ब्लैकविल ने कहा, ‘हमारे हटने के बाद अफगानिस्तान में अव्यवस्था होने वाली है. भारत के हित अब अफगानिस्तान से गहराई तक जुड़े हैं. खतरा इस बात का है कि भारत-पाक के बीच संघर्ष का अगला क्षेत्र अफगानिस्तान बनने वाला है.’

पिछले दो दशकों में भारत में अमेरिकी राजदूत रहे पांच लोगों की ‘राजदूत गोलमेज वार्ता’ को संबोधित करते हुए ब्लैकविल ने कहा, ‘इस बात का कोई सबूत नहीं है कि पाकिस्तानी सेना ने भारत की प्रगति को रोकने के अपने पहले उद्देश्य में कोई बदलाव किया है.’ उन्होंने कहा कि इस बात का भी कोई सबूत नहीं है कि भारत के खिलाफ आतंकी संगठनों के इस्तेमाल की पाकिस्तानी सेना की नीति में कोई बदलाव आया है.

ब्लैकविल ने कहा कि यह स्थिति तब तक नहीं बदलने वाली जब तक पाकिस्तानी सेना अपने इस विचार को नहीं बदलती कि उसे अफगानिस्तान में मुख्य ताकत बनना है और इस युद्ध प्रभावित क्षेत्र में भारत उसका शत्रु है.

अमेरिका-भारत उद्यम परिषद के 38वें वार्षिक नेतृत्व शिखर सम्मेलन में बोलने वाले लोगों में ब्लैक विल के अतिरिक्त भारत में अमेरिका के चार अन्य पूर्व राजदूत शामिल थे. इनमें थॉमस पिकरिंग (1992-93), फ्रैंक विसनर (1994-97), रिचर्ड सेलेस्टे (1997-2001) और टिमोथी रोमर (2009-11) शामिल थे. सभी राजदूतों का मानना था कि आगामी वर्षों में अफगानिस्तान और पाकिस्तान मुद्दों की भारत तथा अमेरिका के आपसी संबंधों में महत्वपूर्ण भूमिका होगी.

फ्रैंक विसनर ने कहा कि नवाज शरीफ की सरकार बनने से भारत को इस्लामाबाद के साथ अपने संबंध सुधारने का मौका मिला है.

उन्होंने कहा, ‘भारत के पास नवाज शरीफ की सरकार से वार्ता शुरू करने का अवसर है. यह बहुत अहम है कि अमेरिका इसे प्रोत्साहित करे. मैं जानता हूं कि यह आसानी से नहीं होने वाला.’ भारत और पाकिस्तान के बीच के कई मुद्दों पर सहमति बनने का हवाला देते हुए रोमर ने कहा कि यह एक बड़ा बदलाव है. उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे सर क्रीक और सियाचिन जैसे मुद्दों को सुलझाने में मदद मिलेगी.

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