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भारत का समर्थन करने वाली सरिता गिरी नेपाली सांसद पद से भी बर्खास्त

सरिता गिरी की समाजबादी पार्टी ने नक्शा विवाद पर भारत का पक्ष लेने के कारण उन्हें ना सिर्फ पार्टी की साधारण सदस्यता से हटा दिया बल्कि उन्हें सांसद पद से बर्खास्त करने की सिफारिश की थी जिस पर आज स्पीकर ने अपना फैसला सुनाते हुए गिरी को सांसद पद से बर्खास्त कर दिया.

नेपाल में सांसद पद से भी बर्खास्त हुई सरिता गिरी (फाइल-ट्विटर) नेपाल में सांसद पद से भी बर्खास्त हुई सरिता गिरी (फाइल-ट्विटर)

  • नक्शे को लेकर नेपाल सरकार के खिलाफ रहीं सरिता गिरी
  • समाजबादी पार्टी ने पहले ही सांसद पद से निष्कासित किया
  • अब नेपाली स्पीकर ने सरिता को सांसद पद से बर्खास्त किया
नेपाल में अपनी पार्टी द्वारा निष्कासित किए जाने के बाद सरिता गिरी को गुरुवार को सांसद पद से औपचारिक रूप से बर्खास्त कर दिया गया. पिछले दिनों नक्शा विवाद पर भारत के पक्ष में बोलने वाली सांसद सरिता को समाजबादी पार्टी ने पद से निष्कासित कर दिया जिससे उनकी संसद सदस्यता भी चली गई थी.

भारत के साथ नक्शा विवाद पर सरिता गिरी शुरुआत से ही नेपाल सरकार का खुलकर विरोध करती रही हैं, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा.

नेपाल के संविधान के मुताबिक अगर किसी पार्टी ने अपने किसी सांसद को पार्टी से निकाल दिया है और उसके सांसद पद से भी हटाने की सिफारिश की जाती है तो स्पीकर को उन्हें बर्खास्त करना ही होता है.

सरिता गिरी की समाजबादी पार्टी ने नक्शा विवाद पर भारत का पक्ष लेने के कारण उन्हें ना सिर्फ पार्टी की साधारण सदस्यता से हटा दिया बल्कि उन्हें सांसद पद से बर्खास्त करने की सिफारिश की थी जिस पर आज स्पीकर ने अपना फैसला सुनाते हुए सरिता गिरी को सांसद पद से बर्खास्त कर दिया.

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हाल ही में सांसद सरिता गिरी ने खुलेआम नेपाली संविधान संशोधन का भी विरोध किया था. नेपाली सरकार की ओर से नए नक्शे को संविधान का हिस्सा बनाने के लिए लाए गए संविधान संशोधन प्रस्ताव पर अलग से अपना संशोधन प्रस्ताव पेश करते हुए सरिता गिरि ने इसे खारिज करने की मांग की थी.

क्या है पूरा मामला

भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद के कारण इन दिनों रिश्ते तनावपूर्ण चल रहे हैं. 8 मई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लिपुलेख से धाराचूला तक बनाई गई सड़क का उद्घाटन किया था.

फिर नेपाल ने लिपुलेख को अपना हिस्सा बताते हुए विरोध किया था. 18 मई को नेपाल ने अपना नया नक्शा जारी किया. इसमें भारत के 3 इलाके लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को नेपाल ने अपना हिस्सा बता दिया.

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नेपाल कैबिनेट की बैठक में भूमि संसाधन मंत्रालय की ओर से नेपाल का यह संशोधित नक्शा जारी किया गया था. बैठक में मौजूद कैबिनेट सदस्यों ने समर्थन किया. नेपाल के इस कदम से भारत और नेपाल की दोस्ती में दरार आनी शुरू हो गई. भारत ने इसका लगातार विरोध किया.

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने भारत पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया. साथ ही यह भी दावा किया कि वो अपनी जमीन वापस लेकर रहेंगे. 11 जून को नेपाल की कैबिनेट ने 9 लोगों की एक समिति का गठन किया.

लेकिन जिस जमीन पर नेपाल लगातार दावा कर रहा है और भारत के साथ विवाद खड़ा कर रहा है. उस जमीन पर अपने अधिकार का नेपाल के पास कोई प्रमाण ही नहीं है.

हालांकि नेपाली संसद में विवादित नक्शे में संशोधन का प्रस्ताव पास हो गया. नए नक्शे में भारत के 3 हिस्से कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को शामिल किया गया. 275 सदस्यों वाली नेपाली संसद में इस विवादित बिल के पक्ष में 258 वोट पड़े थे.

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