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Monkeypox: अमेरिका समेत कई देशों में फैल रहा मंकीपॉक्स, क्यों लगाई जा रही Smallpox की वैक्सीन?

मंकीपॉक्स (Monkeypox) के दुनियाभर में 92 केस मिल चुके हैं. WHO ने इस बीमारी को लेकर अलर्ट जारी किया है. साथ ही कहा है कि अभी अमेरिका में मंकीपॉक्स के और भी केस सामने आ सकते हैं.

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मंकीपॉक्स को लेकर WHO ने अलर्ट जारी किया है (सांकेतिक तस्वीर)
मंकीपॉक्स को लेकर WHO ने अलर्ट जारी किया है (सांकेतिक तस्वीर)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दुनियाभर में अब तक 92 मरीज मिले
  • WHO ने भी अलर्ट जारी किया है

विश्व अभी कोरोना संक्रमण से पूरी तरह उभर भी नहीं पाया कि एक नई बीमारी पैर पसारने लगी है. अमेरिका समेत कई देशों में मंकीपॉक्स (Monkeypox) नामक बीमारी तेजी से फैल रही है. इसे लेकर WHO ने अलर्ट जारी कर दिया है. WHO के अधिकारियों ने बताया कि दुनिया के कई देशों में अभी तक मंकीपॉक्स के 92 मरीज मिल चुके हैं. साथ ही 28 नए संदिग्ध मरीज भी मिले हैं. वहीं UN की एक एजेंसी ने कहा कि अभी मंकीपॉक्स के और अधिक मरीज सामने आ सकते हैं. क्योंकि इस बीमारी का संक्रमण उन देशों में तेजी से फैल रहा है, जहां आमतौर पर ये बीमारी अस्तित्व में नहीं थी.

उधर, WHO के मुताबिक मंकीपॉक्स भले ही कुछ देशों में परेशानी का सबब बन रहा हो, लेकिन यह वेस्ट औऱ सेंट्रल अफ्रीका में नॉर्मल वायरल संक्रमण की तरह है. जो कि साधारण सी बीमारी है. ऐसे में ये देश मंकीपॉक्स से बचाव और इसका प्रसार रोकने में दुनिया के दूसरे देशों की मदद कर सकते हैं.

कितनी खतरनाक है ये बीमारी?

एजेंसी के मुताबिक अमेरिका के स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि अभी इस बीमारी से जोखिम बहुत ज्यादा नहीं है. मंकीपॉक्स एक साधारण सा वायरस है. इससे लोगों को बुखार, शरीर में दर्द की परेशानी हो सकती है. इसके साथ ही मंकीपॉक्स का लक्षण ये भी है कि मरीज के हाथ-पैर में फुंसियां (दाने) निकल आते हैं. उन्होंने कहा कि यह एक तरह से चेचक की बीमारी का ही एक वैरिएंट है. मंकीपॉक्स से पीड़ित मरीज सामान्य तौर पर  दो से चार सप्ताह में पूरी तरह से ठीक हो जाता है. इस बीमारी से मरने वालों का आंकड़ा 1 फीसदी है. 

कितनी तेजी से फैलता है मंकीपॉक्स का वायरस

अमेरिकी हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो यह बीमारी का प्रसार बहुत अधिक नहीं है. इसे ऐसे समझिए कि जितनी तेजी से कोविड-19 संक्रमण पैर पसारता है, उसके मुकाबले यह वायरल बहुत धीमी गति से लोगों को अपनी चपेट में लेता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि हाल ही में जो भी केस इस बीमारी से संबंधित मिले हैं, प्रायः उनमें यह देखा गया है कि मंकीपॉक्स उन लोगों के संपर्क में आने से फैल रहा है जिनके शरीर में दाने निकल आए हैं. 

मैसाचुसेट्स अस्पताल के डॉ. मार्टिन हिर्श बताते हैं कि कोविड संक्रमण सांस के जरिए लोगों को अपनी चपेट में लेता है, लेकिन मंकीपॉक्स को लेकर इस तरह का कोई खतरा नहीं है. यह बहुत घातक बीमारी नहीं है. लेकिन ये भी जरूरी है कि जब इस बीमारी के लक्षण सामने आ जाएं तो सतर्कता बरतें. तुरंत इलाज कराएं .WHO के डेविड हेमैन ने बताया कि मंकीपॉक्स से पीड़ित व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध बनाने पर इसके प्रसार की आशंका काफी  बढ़ जाती है. 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ क्यों हैं  चिंतित?

WHO के अनुसार हमारी चिंता इस बात को लेकर है कि अभी तक जितने भी केस मंकीपॉक्स के सामने आए हैं, वे उन देशों में पाए गए हैं जहां य़े बीमारी कभी थी ही नहीं. ऐसे में ये पता लगाया जा रहा है कि क्या ये वायरस म्यूटेट हुआ है. अभी तक इस बीमारी के सबसे ज्यादा केस यूके, यूएस, स्पेन, पुर्तगाल, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में मिले हैं. जबकि इन देशों में पहले इस तरह की बीमारी नहीं थी. इतना ही नहीं, अभी अमेरिका इसके और ज्यादा मामले सामने आ सकते हैं. डब्ल्यूएचओ के अधिकारियों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यूरोप और अन्य देशों में त्योहारों, पार्टियों और छुट्टियों में लोगों की भीड़ एकत्र होगी, ऐसे में यह संक्रमण फैल सकता है. 

लोग संक्रमण से कैसे बचाव कर सकते हैं?

ब्रिटेन में इस बीमारी से बचाने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों को टीका लगाना शुरू कर दिया गया है. बता दें कि उन्हें फिलहाल वही वैक्सीन लगाई जा रही हैं जो चेचक से बचाव के लिए लगाए जाती हैं. कहा जा रहा है कि मंकीपॉक्स से बचाव के लिए भी यही दवा कारगर है. ब्रिटेन की सरकार का कहना है कि उसके पास स्ट्रेटेजिक नेशनल स्टॉकपाइल (SNS) में चेचक की पर्याप्त वैक्सीन है. इसके यूएस की पूरी आबादी को वैक्सीनेट किया जा सकता है. वहीं अमेरिकी स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि चेचक के लिए एंटीवायरल दवाएं हैं, जिनका इस्तेमाल कुछ परिस्थितियों में मंकीपॉक्स के इलाज के लिए भी किया जा सकता है.

 

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