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रुख में बदलाव, भारत का तालिबान से वार्ता को समर्थन

भारत ने तालिबान के साथ अफगानिस्तान की सुलह समाधान प्रक्रिया का समर्थन किया है लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि इससे अफगान सरकार की वैधता कमजोर नहीं होनी चाहिए.  इसके साथ ही ये भी साफ किया है कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य ‘मानक’ के दायरे में होनी चाहिए.

salman khurshid salman khurshid

भारत ने तालिबान के साथ अफगानिस्तान की सुलह समाधान प्रक्रिया का समर्थन किया है लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि इससे अफगान सरकार की वैधता कमजोर नहीं होनी चाहिए. इसके साथ ही ये भी साफ किया है कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य ‘मानक’ के दायरे में होनी चाहिए.

विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने 20वें आसियान क्षेत्रीय फोरम (एआरएफ) की बैठक में कहा, ‘हम अफगानिस्तान इस्लामी गणराज्य सरकार द्वारा सभी विपक्षी सशस्त्र समूहों के साथ शांति वार्ता शुरू करने के लिए किये गए प्रयासों का समर्थन करते हैं.’ उन्होंने कहा, ‘लेकिन यह एक अफगान के नेतृत्व वाली अफगान के स्वामित्व वाली सुलह समाधान प्रक्रिया होनी चाहिए जो कि अफगान संविधान और अंतरराष्ट्रीय तौर पर स्वीकार्य मानक के दायरे में हो. इस वार्ता प्रक्रिया में अफगान समाज के सभी वर्ग और तालिबान सहित विपक्षी सशस्त्र समूह सम्मिलित होने चाहिए.’ अफगान तालिबान ने गत महीने कतर की राजधानी दोहा में एक राजनीतिक कार्यालय खोला था और अफगान सरकार और अन्य हितधारकों के साथ शांतिवार्ता की इच्छा जतायी थी.

वार्ता की संभावना तब फीकी हो गई जब तालिबान ने ‘इस्लामिक अमीरात आफ अफगानिस्तान’ के नाम से कार्यालय खोलने के साथ ही उस पर उस झंडे का इस्तेमाल किया जो वह अफगानिस्तान में साल 2001 के अमेरिका नीत हमले से पहले देश पर शासन करने के लिए करता था.

अफगानिस्तानी राष्ट्रपति हामिद करजई ने कड़ी प्रतिक्रिया में कहा कि समझौतों का उल्लंघन हुआ है तथा कार्यालय शांतिवार्ता के लिए एक ब्यूरो की बजाय एक प्रतिद्वंद्वी दूतावास जैसा अधिक प्रतीत होता है.

खुर्शीद ने कहा, ‘सुलह समझौता प्रक्रिया ऐसी ना हो जो कि अफगान राज्य और सरकार की वैधता तथा गत दशक के दौरान हुए राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक प्रगति को कमजोर करे जिसमें अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सदस्यों ने काफी योगदान किया है.’ उन्होंने जोर देकर कहा, ‘भारत की अफगानिस्तान नीति में बहिर्गमन नीति नहीं है.’ उन्होंने कहा कि भारत ने अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण और पुनर्वास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है. उन्होंने आतंकवादी समूहों द्वारा फैलाये जा रहे उस आतंकवाद के सार्वभौमिक संकट को लेकर भी चिंता जतायी जिसकी पहुंच वैश्विक है. उन्होंने कहा, ‘आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक योजना एक समग्र ढांचे पर टिकी होनी चाहिए जिसके लिए संयुक्त राष्ट्र में समग्र अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद संधि पर जल्दी निर्णय की जरूरत है.’

खुर्शीद ने कहा, ‘हमें ना केवल आतंकवादी हमले रोकने के लिए बल्कि आतंकवादियों को पकड़कर उन्हें न्याय के दायरे में लाने के लिए अपनी सूचना और संसाधनों का संयोजन करके व्यावहारिक रूप से अपना सहयोग बढ़ाना चाहिए और ऐसा करके आतंकवाद से लड़ने की अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित करनी चाहिए.’ उन्होंने कहा कि आतंकवाद मुख्य तौर पर अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता के लिए खतरा उत्पन्न करता है. उन्होंने पाकिस्तान स्थित आतंकवादी प्रशिक्षण शिविरों की ओर इशारा करते हुए कहा कि अफगान सीमा से बाहर स्थित आतंकवाद के अभयारण्यों और सुरक्षित पनाहगाहों को ध्वस्त करने के लिए समन्वित प्रयास करने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा, ‘हमें अफगानिस्तान को स्थिर, लोकतांत्रिक और बहुलवादी राज्य बनने के उसके प्रयासों में सहायता करनी चाहिए. अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संक्रमणकाल और परिवर्तन की इस अवधि में अफगानिस्तान के प्रति विकास और सुरक्षा सहायता के रूप में प्रतिबद्ध रहना चाहिए.’

खुर्शीद ने जनसंहार हथियारों की प्रौद्योगिकी के चोरी छुपे प्रसार का मुद्दा भी उठाया जो कि अंतररराष्ट्रीय समुदाय के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करता है. उन्होंने कहा, ‘परमाणु हथियार, सामग्री और प्रौद्योगिकी के आतंकवादियों के हाथों में पड़ने के खतरे के समाधान के मद्देनजर भारत इस दिशा में गत कई वषरें से संयुक्त राष्ट्र में एक प्रस्ताव लाने का प्रयास कर रहा है.’ खुर्शीद ने कहा कि भारत कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु मुक्त करने के उद्देश्य का समर्थन करता है.

उन्होंने कहा, ‘हम एशिया प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक परस्पर निर्भरता और सहयोग के संकेतों से बहुत प्रसन्न हैं. वैश्वीकरण से अर्थव्यवस्थाओं का आपस में जुड़ना एक वास्तविकता बन गई है.’ उन्होंने कहा कि ऐसी परस्पर निर्भरता शांति, सुरक्षा और समृद्धता के हमारे साझा लक्ष्यों की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान करती है.

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