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आर्मेनिया से चल रहे विवाद पर अजरबैजान ने कहा- 'अगर भारत शांति के लिए कोई प्रस्ताव लाया तो उसका स्वागत है '

अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच कई दशकों से विवाद चल रहा है. हाल ही में आर्मेनिया ने अजरबैजान पर हमले करने का आरोप लगाया था, जिसे अजरबैजान ने आर्मेनिया के उकसावे के बदले की कार्रवाई बताया था. हालांकि दोनों देशों के बीच अब संघर्ष विराम की स्थिति बन गई है. लेकिन अजरबैजान ने कहा है कि वह क्षेत्र में शांति बहाली के लिए भारत के शांति प्रस्ताव का स्वागत करेगा.

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अजरबैजान के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता लेला अब्दुल्लायेवा अजरबैजान के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता लेला अब्दुल्लायेवा

अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच एक बार फिर से संघर्ष शुरू हो गया है. दोनों देश एक-दूसरे पर हमला करने के आरोप लगा रहे हैं. ऐसे में अजरबैजान ने कहा है कि अगर क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए भारत कोई प्रस्ताव लाता है तो उसका स्वागत है. 

अजरबैजान का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब कुछ समय पहले ही दोनों देशों के बीच संघर्षविराम पर सहमति बनी थी. अजरबैजान के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता लेला अब्दुल्लायेवा ने आर्मेनिया के साथ मौजूदा संकट के बारे में बात करते हुए एक वीडियो इंटरव्यू के दौरान बताया कि हम बातचीत के लिए तैयार हैं. हम दोनों पक्षों के बीच संबंधों को सामान्य करने के लिए किसी भी तरह की पहल का स्वागत करते हैं, जिससे क्षेत्र में शांति और स्थिरता आए. 

भारत के प्रस्ताव का स्वागत करेंगे

एक सवाल के जवाब में प्रवक्ता ने बताया कि अगर भारत किसी तरह की मदद या प्रस्ताव के साथ आता है तो अजरबैजान इस तरह की पहल के लिए हमेशा तैयार है.

उन्होंने कहा, अजरबैजान के आर्थिक, मानवीय, सांस्कृतिक और पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों में अच्छे द्विपक्षीय संबंध हैं. हम भारत के साथ संयुक्त राष्ट्र जैसे बड़े विदेशी संगठनों के साथ सहयोग कर रहे हैं. 

बता दें कि आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच नागोर्नो-कारबाख को लेकर सैन्य संघर्ष की स्थिति है. इस इलाके पर कब्जे को लेकर दोनों देशों में कई दशकों से विवाद जारी है.

इस मसले पर भारत का रुख

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने मंगलवार को कहा था कि भारत का विश्वास है कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय विवाद को डिप्लोमेसी और बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए. सैन्य हमला किसी भी समस्या का समाधान नहीं है. हम दोनों देशों से स्थाई समाधान के लिए बातचीत के जरिए आगे बढ़ने को प्रोत्साहित करते हैं.

आर्मेनिया की ओर से ताजा संघर्षविराम के ऐलान पर प्रतिक्रिया देते हुए अब्दुल्लायेवा ने कहा कि सीमा पर फिलहाल स्थिति शांत है.  उन्होंने कहा, हम बातचीत के लिए तैयार हैं. हमने यह न सिर्फ बयानों से बल्कि अपने व्यवहार से भी साबित किया है कि हम आर्मेनिया के साथ संबंधों को सामान्य करना चाहते हैं लेकिन सिर्फ अंतर्राष्ट्रीय कानून के नियम और सिद्धांतों के आधार पर. 

अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच विवाद

दरअसल 1991 में सोवियत संघ टूटने के बाद 1994 में दोनों देशों के बीच भयंकर युद्ध हुआ था. इस कारण लाखों लोगों को पलायन करना पड़ा था और हजारों लोगों की मौत हुई थी. लेकिन बाद में दोनों देशों के बीच युद्धविराम के बावजूद दोनों के बीच झगड़ा होता रहा.

युद्धविराम से पहले नागोर्नो-काराबाख पर आर्मेनिया की सेना का कब्जा हो गया था. युद्धविराम के बाद ये इलाका अजरबैजान का ही रहा, लेकिन यहां अलगाववादियों की हुकूमत चलने लगी. 

दो साल पहले सितंबर 2020 में भी दोनों देशों के बीच युद्ध हुआ था. इसमें 50 हजार से ज्यादा लोगों के मारे जाने का दावा किया जाता है. फिलहाल इस इलाके में शांति के लिए शांति वार्ता जारी है, लेकिन अब तक बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है. दोनों देशों के बीच अक्सर सैन्य झड़पें होती रहतीं हैं.

इससे पहले आर्मेनिया ने अजरबैजान पर बिना किसी उकसावे के हमला करने का आरोप लगाया है, जिस वजह से दोनों तरफ के दर्जनभर सैनिकों की मौत हो गई. 

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