13 Aug 2026
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बारिश के समय फोन को वाटरप्रूफ समझकर इस्तेमाल करने की भूल न करें. इससे फोन खराब भी हो सकता है. आइए जानते हैं इसके बारे में.
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स्मार्टफोन पानी को एक लिमिट तक ही रोक सकते हैं. इसके बाद फोन के अंदर पानी घुसने के चांस बढ़ जाते हैं, जिसकी वजह से वाटर डैमेज का खतरा बढ़ सकता है.
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इंग्रेस प्रोटेक्शन (IP) का मतलब होता है कि इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में एक खास तरह की प्रोटेक्शन दी गई है. इसके बाद लिखा नंबर, जैसे 6, यह बताता है कि फोन धूल को कितना रोक सकता है.
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IP रेटिंग में आखिर में लिखा नंबर यह बताता है कि फोन पानी से कितना बच सकता है. यह नंबर 0 से 9 तक हो सकता है.
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जब स्मार्टफोन को प्रोटेक्शन रेटिंग के लिए टेस्ट किया जाता है, तो इसे कंट्रोल्ड एनवायरनमेंट में टेस्ट किया जाता है.
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जिन स्मार्टफोन में IP प्रोटेक्शन मिलती है, वे आमतौर पर ताजे पानी से बचने के लिए टेस्ट किए जाते हैं. अगर आप फोन को पूल के पानी में इस्तेमाल करते हैं, तो यह खराब भी हो सकता है.
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कई बार फोन पुराना होने की वजह से उसकी वाटरप्रूफ लेयर कमजोर हो जाती है. इसकी वजह से अगर आप इसे पानी में इस्तेमाल करते हैं, तो फोन खराब हो सकता है.
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रोज इस्तेमाल करते-करते आपका स्मार्टफोन कई बार गिर सकता है. इसकी वजह से फोन की बॉडी पर डेंट पड़ सकता है. पानी से मिलने वाली प्रोटेक्शन कम हो सकती है.
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वाटर डैमेज होने पर स्मार्टफोन कंपनियां इसे आमतौर पर वारंटी में कवर नहीं करती हैं. इसलिए स्मार्टफोन को पूरी तरह वाटरप्रूफ समझकर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.
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