5 Aug 2026
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यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) का भारत में बड़े स्तर पर इस्तेमाल हो रहा है. सिर्फ एक क्विक रिस्पोंस कोड (QR Code) स्कैन करके और पिन एंटर करके, पेमेंट की जा सकती है.
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सिंपल और सिक्योर होने की वजह से भारत में UPI का बड़े स्तर पर इस्तेमाल हो रहा है. बीते महीने करीब 23.7 बिलियन UPI पेमेंट्स हुई हैं.
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अब लौटते हैं कि UPI को लेकर नया नियम क्या है. दरअसल, UPI को लेकर आने वाले दिनों में बदलाव किए जा सकते हैं, जिसके लिए संसद में प्रस्ताव पेश किया है.
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UPI में बदलाव करने के लिए वित्त मंत्री ने संसद में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में संसोधन का प्रस्ताव पेश किया.
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यह प्रस्ताव अगर संसद में मंजूर हो जाता है, तो सरकार को UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का अधिकार मिल जाएगा.
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प्रस्ताव अगर लागू हो जाता है तो बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को सरकार द्वारा नोटिफाइड इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मीडियम पर MDR वसूला जा सकेगा.
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अगर MDR लागू होता है, तो ये चार्ज कस्टमर से नहीं बल्कि व्यापारियों से लिया जाएगा. व्यापारी यह चार्ज बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को डिजिटल पेमेंट प्रोसेसिंग के लिए देंगे.
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रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावों में से एक के तहत 2,000 रुपये से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.3% से 0.5% तक MDR लगाया जा सकेगा.
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यह चार्ज सिर्फ उन बिजनेस पर लागू होगा, जिनका सालभर का टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपये अधिक है.
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पॉलिसीमेकर एक अन्य ऑप्शन पर भी काम कर रहे हैं, जिसमें ट्रांजैक्शन चार्ज की राशि पर नहीं बल्कि सालाना टर्नओवर को आधार बनाकर चार्ज वसूला जाए.
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