सोशल मीडिया नहीं, ये है डिजिटल जहर! बच्चों को नशेड़ी बना रही हैं बड़ी कंपनियां

22 Apr 2026

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क्या है पूरा मामला?

25 मार्च 2026 में लॉस एंजेलिस के जूरी ने पाया कि. सोशल मीडिया ऐप्स को डिजाइन किया गया है. ताकि बच्चों को लत लग जाए. जानिए कैसे सोशल मीडिया एक जहर बनता जा रहा है?

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जानबूझकर डिजाइन किया

ऐप्स के फीचर जैसे इनफिनिटी स्क्रोल. इसको इस तरह बनाया गया है कि लोग ज्यादा से ज्यादा समय इस्तेमाल करें. यह गलती से नहीं हुआ है. बल्कि इसे जानबूझकर डिजाइन किया गया है.

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डिजिटल निकोटिन

रिपोर्ट के मुताबिक सोशल मीडिया को डिजिटल सिगरेट कहा गया है. क्योंकि यह एडिक्टिव है. यह लोगों की भावनाओं के साथ खेलता है. उन्हें बार-बार ऐप पर लाने की कोशिश करता है.

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तंबाकू जैसा तरीका

रिपोर्ट के मुताबिक टेक कंपनियां पुरानी तंबाकू कंपनियों की तरह काम कर रही हैं. पहले बच्चों को इसकी लत लगाई जाती है. ताकि वे पूरी जिंदगी इसका इस्तेमाल करते रहें.

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आपके दुख से मुनाफा

एक्सपर्ट्स का मानना है कि कई ऐप्स को यह पता चल जाता है की कोई व्यक्ति दुखी है. उसे ठीक करने के बजाय ये प्रोडक्ट्स दिखाने लगते हैं. जिससे वे पैसा कमा सकें.

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सेल्फ कंट्रोल खोना

क्योंकि बच्चों का दिमाग अभी विकसित हो रहा होता है. उनके लिए स्क्रोलिंग रोकना बहुत मुश्किल होता है. ऐप्स को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे स्क्रीन को ना नहीं कह पाते.

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खुद को कम समझना

सोशल मीडिया पर सभी परफेक्ट इमेज दिखाई जाती हैं. इसके कारण लोग खुद को दूसरों से कंपेयर करते हैं और दुखी हो जाते हैं.

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कोर्ट की फटकार

हाल ही में लॉसूट में कोर्ट ने कंपनियों को प्राइवेट डॉक्यूमेंट्स दिखाने के लिए मजबूर किया. इसके जरिए लोग समझ सकते हैं कि ये ऐप्स अंदर से कैसे काम करते हैं.

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जाल को हटाना

सोशल मीडिया को इस्तेमाल या अपनी क्रिएटिविटी दिखाने से नहीं रोका जाएगा. मकसद यह है कि लोग ऐप्स पर लंबे समय तक फंसे न रहें.

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