Meta और YouTube देंगे ₹56 करोड़ फाइन, मेंटल हेल्थ खराब करने का आरोप
27 Mar 2026
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क्या है पूरा मामला?
कैलिफोर्निया का एक इम्पोर्टेन्ट कोर्ट केस 25 मार्च 2026 को खत्म हुआ. जूरी ने सोशल मीडिया ऐप्स को जिम्मेदार माना और कहा कि इन ऐप्स को इस तरह डिजाइन किया गया है कि बच्चों में लत लग रही है.
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एक बड़ी पहली
पहली बार ऐसा हुआ है कि जूरी ने सोशल मीडिया कंपनियों को बच्चों की मानसिक सेहत को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार ठहराया है.
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कितना फाइन?
जूरी ने Meta और YouTube पर कुल 6 मिलियन डॉलर (लगभग ₹56 करोड़) का जुर्माना लगाया. इसमें 3 मिलियन डॉलर केस करने वालों के खर्च के लिए और 3 मिलियन डॉलर पेनल्टी के रूप में शामिल हैं.
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किसने कितना भरा?
जूरी ने फैसला दिया कि Meta की गलती ज्यादा है, इसलिए कुल रकम का 70% Meta भरेगा, जबकि YouTube को 30% देना होगा.
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क्या था असली कारण?
वकीलों ने जूरी को बताया कि इन ऐप्स में इन्फिनिट स्क्रॉल जैसे फीचर्स हैं, जिनकी वजह से बच्चे फोन से दूर नहीं हो पाते. जूरी के अनुसार, ऐप्स को सुरक्षा को ध्यान में रखकर डिजाइन नहीं किया गया था.
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किन्होंने किया था?
इस केस की शुरुआत 20 साल की एक लड़की, Kaley, ने की थी. उसने बताया कि इन ऐप्स की वजह से वह डिप्रेशन और बॉडी इमेज से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रही है
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अंदर की सच्चाई
केस के दौरान सामने आए इंटरनल डॉक्यूमेंट्स से पता चला कि कंपनी के अधिकारियों को इन समस्याओं के बारे में पहले से जानकारी थी. Meta के CEO ने भी इस पर गवाही दी.
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यह केस क्यों अलग था?
यह केस अलग इसलिए था क्योंकि इसमें यूजर्स के पोस्ट पर नहीं, बल्कि ऐप्स के डिजाइन और उनके असर पर फोकस किया गया.
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आगे क्या?
दोनों कंपनियों ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है. हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस फैसले के बाद कंपनियों को टीनएजर्स के लिए ऐप्स का डिजाइन बदलना पड़ेगा.