19 May 2026
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भारत अब सिर्फ सिम कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं रहना चाहता. देश सैटेलाइट कनेक्टिविटी की ओर बढ़ रहा है, जिसकी मदद से लोग हर जगह कनेक्टेड रह सकेंगे.
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भारत डायरेक्ट-टू-डिवाइस (D2D) सैटेलाइट टेक्नोलॉजी लाने की तैयारी कर रहा है. इसकी मदद से उन जगहों पर भी नेटवर्क मिल सकेगा, जहां अभी मोबाइल कवरेज नहीं पहुंचता.
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बड़ी टेक कंपनियां जैसे Google और Apple ने भारत सरकार से साफ नियम बनाने की मांग की है. ताकि सैटेलाइट मैसेजिंग और इमरजेंसी फीचर्स सही तरीके से काम कर सकें.
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यह टेक्नोलॉजी उन लोगों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी जो पहाड़ों, घने जंगलों या दूर-दराज के इलाकों में रहते हैं. वहां रहने वाले लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकेगी.
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इस फीचर की मदद से आप किसी इमरजेंसी सिचुएशन में फंस जाते हैं, वहां मोबाइल नेटवर्क नहीं है. तब सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के जरिए इमरजेंसी सेवाओं से कांटेक्ट कर सकेगा.
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इस की मदद से आप किसी इमरजेंसी सिचुएशन में फंस जाते हैं, वहां मोबाइल नेटवर्क नहीं है. तब सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के जरिए इमरजेंसी सेवाओं से कांटेक्ट कर सकेगा.
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एक बड़ी चुनौती फोन की बैटरी यूसेज होगी. जब स्मार्टफोन हजारों किलोमीटर दूर मौजूद सैटेलाइट से कनेक्ट होगा, तो यह सामान्य मोबाइल टावर की तुलना में ज्यादा बैटरी इस्तेमाल करता है.
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स्मार्टफोन को हल्का और स्लिम बनाया जाता है, इसलिए उसके अंदर ज्यादा बड़े एंटीना लगाने की जगह नहीं होती. यह एक बड़ा हार्डवेयर चैलेंज माना जा रहा है.
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