11 May 2026
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10 मई 2026 को दिल्ली पुलिस ने 2 फैक्ट्रियों पर छापा मारा, जहां नकली स्मार्टफोन, चार्जिंग एडेप्टर और ईयरफोन्स बरामद हुए. आइए जानते हैं फेक चार्जिंग एडेप्टर की पहचान कैसे करे.
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सस्ते चार्जर खरीदने की गलती न करें, क्योंकि इनमें बेहद खराब क्वालिटी के पार्ट्स इस्तेमाल किए जाते हैं. ये हाई वोल्टेज का दबाव नहीं झेल पाते, जिससे इनमें धमाका हो सकता है.
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असली चार्जर में सेफ्टी फीचर्स होते हैं, जो ज्यादा गर्म होने पर पावर सप्लाई बंद कर देते हैं. वहीं नकली चार्जर में ऐसा कोई सिस्टम नहीं होता, जिससे वे आसानी से फट सकते हैं.
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नकली चार्जर में बहुत पतले और घटिया तारों का इस्तेमाल किया जाता है. हाई करंट आने पर ये तार पिघल सकते हैं और घर में आग लगने का कारण बन सकते हैं.
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अच्छे चार्जर बैलेंस तरीके से बिजली सप्लाई करते हैं, ताकि फोन सेफ रहे. लेकिन नकली चार्जर सीधे हाई करंट फोन में भेज देते हैं, जिससे फोन ब्लास्ट भी हो सकता है.
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फेक चार्जर में बेहद खराब क्वालिटी का प्लास्टिक इस्तेमाल होता है. जो जल्दी गर्म होकर पिघल सकता है या आग पकड़ सकता है.
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सस्ते चार्जर में खराब सोल्डिंग होती है. इससे स्पार्किंग, शॉर्ट सर्किट और इलेक्ट्रिक शॉक का खतरा बढ़ जाता है. कई बार यही फोन ब्लास्ट की वजह बनता है.
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कई नकली चार्जर पर फास्ट चार्जिंग लिखा होता है, लेकिन वे सही तरीके से पावर कंट्रोल नहीं कर पाते. इससे फोन की बैटरी पर दबाव बढ़ता है और ब्लास्ट का खतरा भी बढ़ जाता है.
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फेक चार्जर से बचने के लिए आप BSI सर्टिफिकेशन और रजिस्ट्रेशन नंबर चेक कर सकते हैं. आउटपुट वोल्टेज आपके फोन से मैच होना चाहिए. इसके अलावा, केबल भी मोटी होनी चाहिए.
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