29 July 2026
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बारिश के मौसम में अधिकतर जगाहों पर भारी उमस का सामना करना पड़ रहा है. उमस से राहत पाने के लिए बहुत से लोग AC का इस्तेमाल करते हैं.
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AC के काम करने का प्रोसेस अलग होता है. पहले इंटरनल यूनिट का ब्लॉअर ऑन होता है, फिर करीब 1-2 मिनट के बाद कंप्रेसर ऑन होता है.
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कंप्रेसर ऑन होने के बाद ही AC कूलिंग देना शुरू करता है. बहुत से लोग गर्मी बर्दास्त नहीं कर पाते हैं और वे तुरंत टर्बो मोड को ऑन कर देते हैं.
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अधिकतर AC के रिमोट में टर्बो मोड दिया जाता है. ये टर्बो मोड कंप्रेसर को इंस्टेंट ऑन कर देता है.
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AC में टर्बो मोड एक्टिवेट करने से इंस्टैंट कूलिंग तो मिलती है, लेकिन बिजली खपत में ही इजाफा होता है.
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नॉर्मल मोड की तुलना में AC का टर्बो मोड ज्यादा बिजली की खपत करता है. हालांकि इससे बिजली में भी इजाफा होता है, लेकिन यह बहुत थोड़ा होता है.
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टर्बो मोड आमतौर पर किसी भी AC के अंदर सिर्फ 20-30 मिनट तक ऑन रहता है. एक बार टाइम ड्यूरेशन कंप्लीट होने के बाद टर्बो मोड ऑटोमेटिक ऑफ हो जाता है.
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AC का टर्बो मोड इसलिए दिया जाता है, जब आपका रूम का टेम्प्रेचर 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर हो जाता है तो ऐसे में इंस्टैंट कूलिंग की जरूरत होती है.
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अलग-अलग ब्रांड के AC के अंदर टर्बो मोड के नाम बदल सकते हैं. कई ब्रांड इसको पावरफुल मोड आदि नाम देते हैं.
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