पितृ पक्ष की ये तिथियां होती हैं बेहद खास, इनपर ना करना भूलें श्राद्ध

21 Aug 2025

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पितृ पक्ष इस बार 7 सितंबर 2025, रविवार से शुरू होगा और इन दिनों का समापन 21 सितंबर, रविवार के दिन ही होगा.

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हिंदू पंचांग के अनुसार, पितृ पक्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से प्रारंभ होता है. इस अवधि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है, जब लोग अपने पितरों का तर्पण करते हैं.

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पितृ पक्ष में पितरों के श्राद्ध करने से वे तृप्त होते हैं और उनका आशीर्वाद बना रहता है. जिससे जीवन और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है.

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पितृ पक्ष की अवधि 15 दिन की होती है. इस अवधि के दौरान कुछ खास तिथियां होती हैं जिनपर पितरों का श्राद्ध करना बहुत ही शुभ माना जाता है.

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पितृ पक्ष के दौरान अगर आप पूरे 15 दिनों तक तर्पण और श्राद्ध नहीं कर पा रहे हैं, तो कुछ खास तिथियों पर श्राद्ध करना भी लाभकारी हो सकता है. आइए जानते हैं उन महत्वपूर्ण तिथियों के बारे में.

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भरणी श्राद्ध पंचमी तिथि को अविवाहित या बिना शादीशुदा लोगों का श्राद्ध करना विशेष होता है. इस दिन इनका तर्पण और श्राद्ध करने से उन्हें शांति मिलती है.

भरणी श्राद्ध

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पंचांग के मुताबिक, भरणी या पंचमी श्राद्ध 11 सितंबर, गुरुवार के दिन किया जाएगा. भरणी श्राद्ध को महाभरणी श्राद्ध के नाम से भी जाना जाता है.

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पितृ पक्ष का नवमी श्राद्ध इस बार 15 सितंबर, सोमवार को किया जाएगा. नवमी श्राद्ध को मातृ श्राद्ध और मातृ नवमी के नाम से जाना जाता है. 

नवमी श्राद्ध

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पितृ पक्ष की सबसे खास और आखिरी तिथि है सर्व पितृ अमावस्या श्राद्ध. सर्व पितृ अमावस्या इस बार 21 सितंबर, रविवार के दिन मनाई जाएगी. 

सर्व पितृ अमावस्या श्राद्ध

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माना जाता है कि अगर किसी पितर के श्राद्ध की तिथि याद ना हो तो सर्व पितृ अमावस्या के दिन उस पितर का श्राद्ध करना बहुत ही अच्छा माना जाता है.

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