सर्दियों में लाल गाजर खाएं या नारंगी, कौन है सेहत का असली खजाना? आधे भारतीय नहीं जानते 

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अक्सर जब हम बाजार जाते हैं तो मन में यह सवाल जरूर आता है कि लाल गाजर खरीदें या नारंगी. 

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ज्यादातर लोग केवल स्वाद या रंग के आधार पर इनका चुनाव करते हैं लेकिन आयुर्वेद और विज्ञान के अनुसार इन दोनों के गुणों में बड़ा अंतर होता है. 

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लाल गाजर आमतौर पर सर्दियों के मौसम में अधिक मिलती हैं और यह भारतीय घरों में हलवा या सलाद के लिए पहली पसंद होती है. 

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वहीं, नारंगी गाजर साल भर उपलब्ध रहती है और इसे विदेशी किस्म का माना जाता है. सेहत के लिहाज से इन दोनों का अपना-अपना महत्व है. 

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लाल गाजर का गहरा रंग उसमें मौजूद लाइकोपीन के कारण होता है. यह वही तत्व है जो टमाटर में भी पाया जाता है. लाइकोपीन दिल को स्वस्थ रखने और शरीर को गंभीर बीमारियों से बचाने में बहुत प्रभावशाली माना जाता है.

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लाल गाजर में प्राकृतिक मिठास अधिक होती है जो इसे कच्चा खाने, इसकी डिशेज बनाने या सूप के लिए बढ़िया ऑप्शन बनाती है. खून की कमी को दूर करने और चेहरे पर चमक लाने के लिए लाल गाजर का सेवन फायदेमंद होता है.

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ऐसा कहा जाता है कि नारंगी गाजर में ल्यूटिन की मात्रा अच्छी होती है जो शरीर को बढ़ती उम्र से जुड़ी किसी भी तरह की बीमारियों से लड़ने में मदद करती है. 

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हालांकि लाल गाजर में भी ल्यूटिन होता है लेकिन वो मुख्य रूप से अपने लाइकोपीन (जो लाल रंग देता है) के लिए जानी जाती हैं जबकि नारंगी गाजर ल्यूटिन का एक बड़ा सोर्स है.

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नारंगी गाजर में भी विटामिन A होता है और इसका बहुत अच्छा असर होता है और यह हमारी स्किन और आंखों के लिए फायदेमंद है. इसका असर भी लाल गाजर जैसा ही होता है. 

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कुल मिलाकर अपनी डाइट में किसी भी रंग की गाजर को शामिल करना फायदेमंद साबित होगा. ये दोनों ही स्किन, बालों, आंखों, दिल और शरीर के दूसरे जरूरी अंगों को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं.

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खबर में बताई गई चीजें सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. अमल में लाने से पहले कृपया अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर करें.

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