10 Nov 2025
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किडनी डैमेज एक साइलेंट किलर है, जो कई बार तब तक पता नहीं चलता जब तक बीमारी काफी बढ़ न जाए. कई बार मरीज को तब पता चलता है जब 70-80% नुकसान हो चुका होता है.
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पद्मश्री पुरस्कार विजेता पीडियाट्रिक और नेफ्रोलॉजी डॉ. संजीव बागई ने इसके शुरुआती लक्षणों को सही समय पर पहचानने की सलाह दी है. उनके मुताबिक, किडनी डैमेज धीरे-धीरे बढ़ता है, लेकिन शरीर इसके संकेत देने लगता है.
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भूख कम या ज्यादा लगना और हर समय थकान महसूस होना भी किडनी के धीरे-धीरे खराब होने का संकेत हो सकता है. जब किडनी ठीक से काम नहीं करती है, तो शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं, इससे भूख कम लगती है और किसी जगह पर ध्यान नहीं लगता है.
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कई बार हाथ-पैर में सूजन दिखने लगती है, यह भी किडनी फंक्शन कम होने का एक आम लक्षण है, क्योंकि शरीर में जमा प्रोटीन और पानी बाहर नहीं निकल पाता है.यह चेहरे और आंखों के नीचे भी बढ़ सकती है.
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बार-बार पेशाब आना, बहुत कम पेशाब होना या झागदार मूत्र आना ये सभी किडनी फंक्शन में गड़बड़ी के शुरुआती संकेत हो सकते हैं.
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किडनी और ब्लड प्रेशर एक-दूसरे पर असर डालते हैं. लगातार बढ़ा हुआ BP किडनी को नुकसान पहुंचाता है, और खराब किडनी ब्लड प्रेशर को और बढ़ा देती है.
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अगर दिनभर सुस्ती रहती है, शरीर भारी लगता है तो यह शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने का नतीजा हो सकता है. क्योंकि किडनी उन्हें फिल्टर नहीं कर पा रही. इसलिए थकान महसूस होती है, जो किडनी फेलियर का साइन हो सकता है.
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डॉ. संजीव बागई के अनुसार, हर 6-12 महीने में क्रिएटिनिन, यूरिन एनालिसिस और eGFR जैसे टेस्ट करवाने चाहिए, क्योंकि ये किडनी की सही स्थिति बताते हैं.
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नमक और प्रोसेस्ड फूड कम खाएं, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रखें. इसके अलावा सबसे जरूरी है कि पर्याप्त पानी पिएं और स्मोकिंग या अल्कोहल से दूरी बनाएं.
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