1.5 को डेढ़, 2.5 को ढाई क्यों कहते हैं... फिर 3:30 का क्यों नहीं है अलग नाम?

24 Sep 2025

Photo: AI Generated

लोग 1.5 को डेढ़ और 2.5 ढाई बोलते हैं जबकि 3.5, 4.5 और 15.5 को साढ़े 3, साढ़े 4 और साढ़े 15 कहते हैं.

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लेकिन आपने कभी सोचा है ऐसा क्या हैं 1.5 और 2.5 को साढ़े एक या साढ़े दे क्यों नहीं बोला जाता है. आइए आपको बताते हैं.

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दरअसल, भारत में जो गिनती का सिस्टम है, उसमें डेढ़ और ढाई जैसे शब्द फ्रैक्शन में चीजों को बताते हैं.

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भारत में आज से नहीं बल्कि आदि काल से होते चला आ रहा है. चलिए अब आपको ये बताते हैं कि ये फ्रैक्शन क्या होता है.

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फ्रैक्शन (Fraction) किसी पूर्ण संख्या के किसी भाग या हिस्से को बताने वाली संख्या को कहते हैं.

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जैसे कि 3 में 2 से भाग दिया जाए तो उसे डेढ़ कहेंगे या फिर 5 को 2 से भाग दें तो उसे ढाई कहेंगे.

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आज के वक्त में लोगों को 2, 3, 4, 5 के पहाड़े यानी टेबल पढ़ाए जाते हैं मगर पुराने वक्त में ‘चौथाई’, ‘सवा’, ‘पौने’, ‘डेढ़’ और ‘ढाई’ के पहाडे़ भी पढ़ाए जाते थे.

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सालों से 1/4 के लिए पाव, 1/2 के लिए आधा, 3/4 के लिए पौन, प्लस 3/4 के लिए सवा, जैसे शब्दों का इस्तेमाल हो रहा है.

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‘साढ़े एक’ कहने ज्यादा आसान है ‘डेढ़’ या ‘ढाई’ कहना. जबकि ‘4 बजकर 15 मिनट’ कहने से ज्यादा आसान है ‘सवा 4’ कहना.

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वहीं ‘4 बजने में 15 मिनट बाकी’ कहने से आसान है ‘पौने चार’ कहना. इसलिए हिन्दी के गणित के शब्दों को घड़ी के लिए भी इस्तेमाल किया जाने लगा.

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यह फंडा केवल टाइम के साथ ही नहीं है, बल्कि रुपयों-पैसों के हिसाब या लेनदेन में भी और गिनती वाली अन्य स्थितियों में भी हम ऐसा ही बोलते हैं.

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जैसे 150 और 250 को डेढ़ सौ रुपये या ढाई सौ रुपये.

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"1.5" को "ढेढ़" बोलने के पीछे मुख्य कारण यह है कि हिंदी में "ढेढ़" शब्द का अर्थ "आधा" से थोड़ा अधिक होता है.

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भारत में 3:30 को साढ़े तीन इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह समय बताने का एक आसान तरीका है.

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