27 May 2026
By; Ashwin Satyadev
कार सर्विस सेंटर जाइए या किसी बड़े पेट्रोल पंप पर रुक जाइए. एक सलाह जरूर मिलती है, “सर, नाइट्रोजन भरवा लीजिए. टायर की लाइफ बढ़ जाएगी.”
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ये सुनकर ऐसा लगता है जैसे अब तक आप टायर के साथ नाइंसाफी कर रहे थें. ऊपर से दावे ऐसे कि माइलेज बढ़ेगा, टायर ठंडे रहेंगे, पंचर कम होंगे और गाड़ी हवा से बातें करेगी.
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लेकिन कहानी में ट्विस्ट ये है कि जिस रेगुलर एयर को हम मामूली समझकर भरवाते हैं, उसमें भी करीब 78% नाइट्रोजन पहले से मौजूद होती है.
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फिर सवाल उठता है कि आखिर बाकी के 22% के लिए जेब ढीली करना कितना समझदारी वाला सौदा है.
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क्या सच में नाइट्रोजन भरवाने के बाद आपकी गाड़ी की परफॉर्मेंस बढ़ती है. आज इसी ‘हवा के साइंस’ का पूरा हिसाब आसान भाषा में समझते हैं.
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हम जो रेगुलर हवा टायर में भरवाते हैं, उसमें करीब 78 प्रतिशत नाइट्रोजन और 21 प्रतिशत ऑक्सीजन होती है. बाकी हिस्सा दूसरी गैसों से मिलकर बना होता है.
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टायरों में भरी जाने वाली नाइट्रोजन लगभग 100% शुद्ध होती है. सबसे बड़ा फर्क यह है कि नाइट्रोजन एक सूखी गैस है, जबकि रेगुलर एयर में नमी होती है.
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रेगुलर एयर के साथ थोड़ी नमी भी टायर के अंदर जाती है. टायर गर्म होने पर यही नमी भाप में बदल सकती है, जिससे टायर प्रेशर ऊपर-नीचे होता रहता है.
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वहीं नाइट्रोजन में नमी नहीं होती, इसलिए उसका प्रेशर ज्यादा स्टेबल रहता है. यही वजह है कि तेज गर्मी या लंबी ड्राइव में भी नाइट्रोजन वाले टायर का प्रेशर जल्दी बदलता नहीं है.
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रेगुलर एयर की एक समस्या ये भी है कि, इसमें मौजूद नमी के चलते व्हील रिम्स में धीरे-धीरे जंग लगने का भी खतरा होता है.
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वहीं दूसरी तरफ नाइट्रोजन के पाटिकल्स ऑक्सीजन से बड़े होते हैं, इसलिए यह टायर से धीरे-धीरे बाहर निकलते है.
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मतलब साफ है कि नाइट्रोजन वाले टायरों में हवा जल्दी नहीं निकलती है और बार-बार प्रेशर चेक कराने की जरूरत थोड़ी कम पड़ती है.
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जहां रेगुलर एयर लगभग हर पेट्रोल पंप पर मुफ्त या बेहद कम कीमत में मिल जाती है, वहीं नाइट्रोजन के लिए अलग से पैसे देने पड़ते हैं.
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कई जगह चारों टायरों में नाइट्रोजन भरवाने का खर्च 100 से 150 रुपये तक पहुंच जाता है. और नाइट्रोजन हर जगह मिल जाए ये जरूरी भी नहीं.
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खासकर छोटे शहरों, गांवों या नए एक्सप्रेसवे पर नाइट्रोजन एयर मिलने में मुश्किल होती है. ऐसे में आपको बीच रास्ते रेगुलर एयर से काम चलाना पड़ सकता है.
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पहले से नाइट्रोजन भरे टायर में जब रेगुलर एयर डाली जाती है तो नाइट्रोजन का असर कम पड़ने लगता है. और उसकी परफॉर्मेंस भी रेगुलर एयर जैसी ही हो जाती है.
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अगर आप अक्सर हाईवे या एक्सप्रेसवे पर ड्राइव करते हैं या तेज स्पीड पर कार चलाते हैं, तो नाइट्रोजन आपके लिए फायदेमंद हो सकती है.
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इससे टायर का टेंप्रेचर और प्रेशर ज्यादा स्टेबल रहता है, जिससे टायर फटने या पंचर होने का खतरा थोड़ा कम हो जाता है.
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यही कारण है कि मोटरस्पोर्ट्स और एयरक्राफ्ट में भी नाइट्रोजन का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन डेली सिटी ड्राइविंग के लिए रेगुलर एयर ही पर्याप्त है.
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