13 May 2026
By: Ashwin Satyadev
दिल्ली में सफर अब पहले से कहीं ज्यादा तेज और स्मार्ट होने जा रहा है. राजधानी के मुंडका-बक्करवाला टोल प्लाजा पर नया बैरियर-लेस सिस्टम लगा दिया गया है.
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केंद्रीय सड़क परिवहन राजमंत्री नितिन गडकरी ने इस नए मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) सिस्टम से लैस बैरियरलेस टोल प्लाजा का शुभारंभ किया.
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न बैरियर, न लंबी लाइन और न ही इंतजार. गाड़ियां अब बिना रुके सीधे टोल पार कर रही हैं और टोल टैक्स अपने आप कट रहा है.
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AI और ऑटोमेशन के दौर में यह बदलाव हाईवे सिस्टम के काफी बेहतर माना जा रहा है. तो आखिर कैसे काम करता है ये सिस्टम और क्या हैं इसके फायदे.
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MLFF सिस्टम पूरी तरह हाई-टेक कैमरा, सेंसर और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन यानी ANPR टेक्नोलॉजी पर बेस्ड होता है.
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हाईवे पर तय दूरी पर बड़े इलेक्ट्रॉनिक गैंट्री लगाए जाते हैं, जिन पर हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे, RFID रीडर, लेजर सेंसर और सर्वर सिस्टम लगे होते हैं.
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जैसे ही कोई वाहन इस गैंट्री के नीचे से गुजरता है, कैमरा उसकी नंबर प्लेट स्कैन करता है और FASTag में लगे RFID चिप को भी रीड करता है.
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इसके बाद सिस्टम वाहन की कैटेगरी, यात्रा की दूरी और एंट्री-एग्जिट पॉइंट के आधार पर टोल कैलकुलेट करता है.
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अगर वाहन में एक्टिव FASTag लगा है, तो टोल सीधे बैंक खाते या वॉलेट से कट जाता है.
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वहीं जिन गाड़ियों में FASTag नहीं होगा, उनका नंबर प्लेट डेटा केंद्रीय सर्वर पर रिकॉर्ड किया जाएगा और बाद में ई-चालान या पेनल्टी जारी की जा सकती है.
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पूरा डेटा रियल टाइम में नेशनल टोलिंग नेटवर्क और ट्रांसपोर्ट डेटाबेस से जुड़ा रहेगा, जिससे वाहन की पहचान तुरंत हो सकेगी.
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सरकार का कहना है कि, इस बैरियर-लेस टोल प्लाजा से वाहन चालक बिना रूके 80 किमी/घंटा की स्पीड से आसानी से गुजर सकते हैं.
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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि, इस सिस्टम से टोल प्लाजा का ऑपरेशनल कॉस्ट 15% से घट कर 3-4% हो जाएगा. यानी मोटी बचत की उम्मीद है.
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सरकार का मनना है कि, इससे सालाना लगभग 250 करोड़ लीटर ईंधन की बचत होने और कार्बन उत्सर्जन में लगभग 81,000 टन कमी आने की उम्मीद है,
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