27 September 2026
By: Aaj Tak Auto
CNG गाड़ियों की सेफ्टी बढ़ाने के लिए IGL ने नया ऑटोमेटेड वेरिफिकेशन सिस्टम शुरू किया है.
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अब CNG स्टेशन पर गाड़ी के नंबर के साथ सिलेंडर के हाइड्रो-टेस्ट की वैलिडिटी भी चेक की जाएगी.
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IGL के नए सिस्टम में कैमरे से गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर कैप्चर किया जाएगा. इसके बाद AI बेस्ड सिस्टम गाड़ी और CNG सिलेंडर से जुड़ी जानकारी को वेरिफाई करेगा.
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गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर कैप्चर होने के बाद सिस्टम CNG सिलेंडर की डिटेल से उसे मैच करेगा. और सिलेंडर की टेस्टिंग और वैलिडिटी चेक की जाएगी.
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सिस्टम पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) के पोर्टल के जरिए CNG सिलेंडर की वैलिडिटी चेक करेगा.
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इससे पता चलेगा कि सिलेंडर का हाइड्रो-टेस्ट वैलिड है या एक्सपायर हो चुका है.
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अगर गाड़ी के CNG सिलेंडर का हाइड्रो-टेस्ट सर्टिफिकेट वैलिड नहीं है, तो स्टेशन के सिस्टम में अलर्ट जारी होगा. ऐसी गाड़ियों की CNG रिफ्यूलिंग रोकी जा सकेगी.
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CNG सिलेंडर की हाइड्रो टेस्टिंग हर 3 साल में एक बार कराना जरूरी है. यह टेस्ट PESO से अप्रूव्ड सिलेंडर टेस्टिंग सेंटर पर कराया जाना चाहिए.
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IGL ने इस टेक्नोलॉजी बेस्ड सिस्टम को अभी 10 CNG स्टेशनों पर शुरू किया है. कंपनी आने वाले दिनों में इसे अपने सभी स्टेशनों पर लागू करने की तैयारी कर रही है.
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ऑटोमेटेड सिस्टम से मैन्युअल जांच पर निर्भरता कम होगी. साथ ही ऐसे वाहनों की पहचान आसान होगी, जो CNG सिलेंडर के सेफ्टी नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं.
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यानी आने वाले समय में CNG स्टेशन पर सिर्फ गाड़ी की पहचान नहीं, बल्कि उसके सिलेंडर की सेफ्टी हिस्ट्री भी डिजिटल तरीके से जांची जा सकेगी.
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