26 May 2026
By: Ashwin Satyadev
देश भर में भीषण गर्मी का प्रकोप शुरू हो चुका है. कई शहरों में तापमान 45 डिग्री को भी पार कर चुका है. ऐसे में लोग कई तरह के एहतियात बरते रहे हैं.
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इस भीषण गर्मी में कार में सफर करना किसी सजा से कम नहीं है. कई बार कार के अंदर बैठना किसी ओवन में बैठने जैसा महसूस होने लगता है.
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तेज धूप, गर्म सीटें और तपता हुआ स्टीयरिंग लोगों को कार में अलग-अलग तरह के जुगाड़ अपनाने पर मजबूर कर देता है.
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इन्हीं में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली चीज है कार विंडो सनशेड. लेकिन क्या आप जानते हैं सनशेड को लेकर की गई नियमों की अनदेखी आपको भारी पड़ सकती है.
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कार विंडो सनशेड एक ऐसा कवर होता है जो कार की खिड़कियों या विंडशील्ड पर लगाया जाता है ताकि धूप और UV किरणों को कम किया जा सके.
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इसे नायलॉन, नेट फैब्रिक, एल्यूमिनियम फॉइल और दूसरे मटेरियल से बनाया जाता है. इसका मकसद कार के केबिन को ठंडा रखना और अंदर बैठे लोगों को धूप से बचाना होता है.
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भारत में कार के विंडो या विंडशील्ड पर ऐसा कोई भी कवर लगाना जो बाहर से अंदर की विजिबिलिटी कम करे, कानून के खिलाफ माना जाता है.
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साल 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि ब्लैक फिल्म, टिंटेड ग्लास, पर्दे, सनशेड या कोई भी ऐसा मटेरियल जो रोशनी को रोकता हो, गैरकानूनी है.
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हालांकि आम लोगों के बीच यह धारणा बनी हुई है कि सिर्फ काली फिल्म या गहरे टिंट वाले शीशे ही अवैध हैं और हल्के सनशेड इस्तेमाल किए जा सकते हैं.
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लेकिन कानून के अनुसार अगर कोई चीज ड्राइवर की विजिबिलिटी कम करती है, तो उसे गलत माना जा सकता है. यही वजह है कि ऐसे मामलों में पुलिस कार्रवाई करती है.
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भारत में वाहनों से जुड़े नियम मोटर व्हीकल एक्ट 2019 और सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स 1989 के तहत तय किए जाते हैं.
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नियम 100(3) के अनुसार कार की फ्रंट और रियर विंडशील्ड में कम से कम 70% विजुअल लाइट ट्रांसमिशन यानी VLT होना जरूरी है.
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वहीं साइड विंडो के लिए यह सीमा 50 प्रतिशत तय की गई है. इसका मतलब है कि कार के शीशे इतने पारदर्शी होने चाहिए कि पर्याप्त रोशनी अंदर जा सके.
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आसान भाषा में कहें तो फ्रंट शीशा 30 प्रतिशत से ज्यादा रोशनी नहीं रोक सकता और साइड विंडो 50 प्रतिशत से ज्यादा रोशनी नहीं रोक सकती.
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सुप्रीम कोर्ट ने 4 मई 2012 को कहा था कि कार के शीशों पर कोई भी एक्स्ट्रा फिल्म, पर्दा, सनशेड या दूसरी चीज नहीं लगाई जा सकती, चाहे उसका VLT प्रतिशत कितना भी क्यों न हो.
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यहीं सबसे ज्यादा भ्रम देखने को मिलता है. कई लग्जरी कारों में कंपनी की तरफ से रोलओवर सनशेड दिए जाते हैं.
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आमतौर पर फैक्ट्री फिटेड सनशेड को कानूनी माना जाता है क्योंकि उन्हें वाहन निर्माता तय VLT नियमों के अनुसार डिजाइन करते हैं और उन्हें RTO अप्रूवल भी मिलता है.
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लेकिन यदि कंपनी फिटेड सनशेड या कवर से भी विजिबिलिटी प्रभावित होती है तो उस पर भी कार्रवाई होना संभव है.
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कानून का सबसे बड़ा उद्देश्य ड्राइवर की साफ विजिबिलिटी बनाए रखना और अपराधिक गतिविधियों में गाड़ियों के गलत इस्तेमाल को रोकना है.
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दिल्ली मोटर व्हीकल रूल्स के अनुसार कार के सभी शीशे इतने पारदर्शी होने चाहिए कि ड्राइवर को आगे, साइड और पीछे साफ दिखाई दे.
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