24 May 2026
By: Ashwin Satyadev
गर्मी के मौसम में धूप में खड़ी कार का दरवाजा खोलते ही ऐसा लगता है जैसे किसी छोटे ओवन का दरवाजा खुल गया हो. कई बार कार के अंदर बैठना भी मुश्किल हो जाता है.
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लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ कारें दूसरों के मुकाबले ज्यादा गर्म क्यों हो जाती हैं? इसका बड़ा कारण आपकी कार का रंग हो सकता है.
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कार का रंग सिर्फ उसकी खूबसूरती नहीं बढ़ाता, बल्कि यह भी तय करता है कि कार के अंदर कितनी गर्मी महसूस होगी.
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एक्सपर्ट्स के अनुसार गहरे रंग की कारें गर्मी को अपनी तरफ खींचती हैं. जब ऐसी कारें तेज धूप में खड़ी रहती हैं, तो उनका बाहरी हिस्सा सूरज की गर्मी को तेजी से सोख लेता है.
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यही गर्मी धीरे-धीरे कार के केबिन तक पहुंचती है और अंदर का तापमान काफी बढ़ जाता है. यही वजह है कि काली कारें सफेद या सिल्वर कारों की तुलना में ज्यादा गर्म महसूस होती हैं.
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हल्का रंग सूरज की रोशनी को ज्यादा मात्रा में वापस परावर्तित कर देता है. इसका मतलब है कि ये रंग गर्मी को कम सोखते हैं.
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यही कारण है कि हल्के रंग की कारों का केबिन अपेक्षाकृत ठंडा रहता है. इससे कार में चलने वाले AC पर भी कम प्रेशर पड़ता है.
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सिर्फ रंग ही नहीं, बल्कि कार में इस्तेमाल होने वाला पेंट भी गर्मी पर असर डालता है. सामान्य सॉलिड पेंट ज्यादा गर्मी सोखते हैं.
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वहीं मेटैलिक, पर्ल और कैंडी पेंट में ऐसे खास एलिमेंट मिलाए जाते हैं जो रोशनी को ज्यादा रिफ्लेक्ट करते हैं. इससे कार का सरफेस कम गर्म होता है.
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तो आइये जानते हैं किस रंग की कार कितनी हीट ऑब्जर्व करती है और लगभग कितना गर्म हो सकती है.
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सफेद रंग की कार लगभग 60% सूर्य की रोशनी को रिफ्लेक्ट करती है और तकरीबन 40% हीट ऑब्जर्व करती है. ऐसे में इसका केबिन 43 से 45 डिग्री तक जा सकता है.
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सिल्वर कलर की कार लगभग 50% से 60% सनलाइट रिफ्लेक्ट करती है और 40 से 50% हीट ऑब्जर्व करती है. इसका केबिन 45 से 47 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है.
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ग्रीन कलर कार की बॉडी भी 40 से 50% रोशनी को रिफ्लेक्ट करता है और 60% तक हीट ऑब्जर्व करता है. इसका केबिन लगभग लगभग 45 डिग्री तक गर्म हो सकता है.
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ब्लू कलर की कार 30से 40% सनलाइट रिफ्लेक्ट करती है और लगभग 60 से 70% हीट ऑब्जर्व करती है. इसका केबिन टेंप्रेचर लगभग 48 डिग्री तक पहुंच सकता है.
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रेड कलर कार की बॉडी 20 से 30% तक रोशनी रिफ्लेक्ट करती है और 70 से 80% हीट ऑब्जर्व करती है. इसका केबिन लगभग 51 डिग्री तक गर्म हो सकता है.
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येलो कलर की कार 10 से 20% तक ही लाइट रिफ्लेक्ट कर पाती है और तकरीबन 80% तक हीट ऑब्जर्व करती है. इसका केबिन टेंप्रेचर लगभग 50 डिग्री तक पहुंच सकता है.
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ब्लैक कलर की कार 5% से भी कम रोशनी रिफ्लेक्ट करती है और लगभग 95% हीट ऑब्जर्व करती है. इसलिए इसका केबिन सबसे ज्यादा 60 डिग्री तक गर्म हो सकता है.
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यहां कारों के केबिन का टेंप्रेचर मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है, जो एक्सट्रीम हीट कंडिशन के अनुसार दी गई है. इसमें भिन्नता संभव है.
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