16 July 2026
आजतक एग्रीकल्चर डेस्क
मॉनसून में पौधों को भरपूर पानी मिलता है, लेकिन यही बारिश कई बार उनके लिए परेशानी भी बन जाती है. लगातार नमी और गमले में पानी जमा रहने से पौधों की जड़ें सड़ने लगती हैं, जिसे रूट रॉट (Root Rot) कहा जाता है.
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इस बीमारी में पौधे की जड़ें कमजोर होकर सड़ जाती हैं और धीरे-धीरे पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं. समय पर ध्यान न दिया जाए तो स्वस्थ दिखने वाला पौधा भी सूख सकता है.
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बारिश के मौसम में अक्सर लोग पौधों को जरूरत से ज्यादा पानी दे देते हैं. गमले की मिट्टी में लगातार पानी जमा रहने से जड़ों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती. इससे फंगस और बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं और जड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं.
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अगर पत्तियां पीली पड़ रही हैं, पौधे की ग्रोथ रुक गई है. तने कमजोर या नरम हो गए हैं, मिट्टी से खराब गंध आ रही है या जड़ों का काला और मुलायम हो जाना रूट रॉट कहलाता है.
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इससे बचने के लिए गमले के नीचे पानी निकलने के लिए छेद जरूर होना चाहिए. जरूरत हो तो नीचे कंकड़ या छोटे पत्थरों की परत डालें ताकि अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके.
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बारिश के दिनों में पौधों को अलग से पानी देने से पहले मिट्टी की नमी जरूर जांच लें. अगर जड़ें काली और सड़ी हुई दिखें तो पौधे को निकालकर खराब हिस्से काट दें और नई सूखी मिट्टी में दोबारा लगाएं.
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पौधों को बहुत ज्यादा घना न रखें. हवा का सही प्रवाह फंगल संक्रमण को रोकने में मदद करता है. नीम खली या नीम तेल का हल्का इस्तेमाल मिट्टी में फंगस की समस्या कम करने में मदद कर सकता है.
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तुलसी, गुलाब, मनी प्लांट और कई इंडोर पौधों में बारिश के दौरान रूट रॉट की समस्या ज्यादा देखने को मिलती है.
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