फसल की भूसी का करें स्मार्ट इस्तेमाल, बढ़ेगी मिट्टी की नमी, घटेंगे खरपतवार

4 April 2026

आजतक एग्रीकल्चर डेस्क

फसल की भूसी को आमतौर पर कचरा समझकर फेंक दिया जाता है. लेकिन इसे सही उपयोग से किसान अपने खेत की बेहतर देखभाल कर सकते हैं.

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धान का भूसा राइस मिल या सड़क के किनारे ऐसे ही पड़ा रहता है. इस्तेमाल ना होने के कारण लोग इसमें आग लगा देते हैं, जिससे प्रदूषण भी बढ़ता है.

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कृषि वैज्ञानिक की मानें तो धान की भूसी का इस्तेमाल मल्चिंग के रूप में किया जा सकता है. इससे खरपतवार को नियंत्रण करने में भी मदद मिलती है.

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आमतौर पर खेतों में खरपतवार नियंत्रण के लिए किसान प्लास्टिक मल्चिंग का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसके कई नुकसान भी हैं.

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प्लास्टिक मल्चिंग की वजह से मिट्टी प्रदूषित हो जाती है. इतना ही नहीं गर्मी के मौसम में मिट्टी का तापमान भी बढ़ जाता है, जो पौधों को नुकसान पहुंचाता है.

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फसल की भूसी का मल्चिंग के रूप में उपयोग करने से खेतों की नमी लंबे समय तक बनी रहती है. सूक्ष्मजीवों की सक्रियता बढ़ाकर मिट्टी को नरम बनाती है.

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भूसी का मल्चिंग वाष्पीकरण को कम करती है, जिससे 40 मिमी तक पानी की बचत होती है और फसल को कम सिंचाई की जरूरत होती है. 

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भूसे की मोटी परत प्रकाश को रोकती है,यह गर्मियों में मिट्टी को ठंडा और सर्दियों में गर्म रखती है, जो जड़ों के विकास के लिए अनुकूल है. साथ ही खरपतवार नहीं उग पाते.

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 धान का भूसा सड़कर कार्बनिक पदार्थ और पोषक तत्व में बदल जाता है, जिससे मिट्टी भी उपजाऊ बनती है.

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