07 Jan 2026
आजतक एग्रीकल्टर डेस्क
इन दिनों उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड और शीतलहर का प्रकोप है.साथ ही फसलों पर पाले का खतरा भी मंडरा रहा है. दरअसल, रात का पारा शून्य डिग्री के नीचे गिरता है,तो ओस की बूंदें बर्फ की घातक परतों में बदल जाती हैं.
Credit: Pixabaye
जमा हुआ पानी पौधों के लिए बहुत नुकसानदायक है. इससे लहलहाती फसलें रातों-रात काली पड़कर झुलस जाती हैं. विशेषकर आलू, टमाटर, सरसों और मटर जैसी संवेदनशील फसलों के लिए.
Credit: Pixabaye
कृषि एक्सपर्ट की मानें तो फसल को पाले से बचाने का सबसे पुराना और कारगर तरीका है खेत की मेड़ों पर घास-फूस जलाकर धुआं करना. धुआं से खेत के ऊपर एक सुरक्षा कवच बन जाता है जो गर्मी को बाहर नहीं जाने देता.
Credit: Pixabaye
इसके अलावा, खेत में हल्की सिंचाई करना भी बहुत फायदेमंद है. गीली जमीन का तापमान सूखी जमीन से ज्यादा होता है, जिससे मिट्टी में गर्माहट बनी रहती है और पाले का असर कम हो जाता है.
Credit: Pixabaye
अगर संभव हो तो दो लोग मिलकर एक लंबी रस्सी को फसल के ऊपर से फेरें जैसे रस्सी लगा कर फसल को हिलाएं. इससे पत्तों पर जमी ओस गिर जाती है.
Credit: Pixabaye
छोटे पौधों या नर्सरी को बचाने के लिए उन्हें प्लास्टिक या घास-फूस से ढक देना चाहिए. बस ध्यान रहे कि दक्षिण-पूर्व दिशा खुली हो ताकि सुबह की धूप पौधों को मिल सके.
Credit: Pixabaye
वैज्ञानिक तरीके से बचाव के लिए आप कुछ खास चीजों का स्प्रे कर सकते हैं. 15 लीटर पानी में 40 ग्राम घुलनशील सल्फर या 25 ग्राम ग्लूकोज घोलकर छिड़काव करें
Credit: Pixabaye
ऐसा करने से पौधों को मजबूती मिलती है. इसके अलावा, 20 ग्राम यूरिया प्रति लीटर पानी में घोलकर स्प्रे करने से भी पाले का असर कम होता है.
Credit: Pixabaye
फसलों को हर साल पाले से बचाने के लिए खेत की उत्तर-पश्चिम दिशा में वायुरोधक पेड़ जैसे शीशम, बबूल या आम लगाने चाहिए. ये पेड़ ठंडी हवाओं की सीधी मार को रोकते हैं.
Credit: Unsplash
खेती में सही मैनेजमेंट और समय पर उठाए गए कदम ही आपकी फसल को भारी नुकसान से बचा सकते हैं.
Credit: Pixabay