ठंड-शीतलहर में बर्बाद न हो जाए फसल, पाले से बचाव के लिए अपनाएं ये देसी उपाय

07 Jan 2026

आजतक एग्रीकल्टर डेस्क

इन दिनों उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड और शीतलहर का प्रकोप है.साथ ही फसलों पर पाले का खतरा भी मंडरा रहा है. दरअसल, रात का पारा शून्य डिग्री के नीचे गिरता है,तो ओस की बूंदें बर्फ की घातक परतों में बदल जाती हैं.

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जमा हुआ पानी पौधों के लिए बहुत नुकसानदायक है. इससे लहलहाती फसलें रातों-रात काली पड़कर झुलस जाती हैं. विशेषकर आलू, टमाटर, सरसों और मटर जैसी संवेदनशील फसलों के लिए.

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कृषि एक्सपर्ट की मानें तो फसल को पाले से बचाने का सबसे पुराना और कारगर तरीका है खेत की मेड़ों पर घास-फूस जलाकर धुआं करना. धुआं से खेत के ऊपर एक सुरक्षा कवच बन जाता है जो गर्मी को बाहर नहीं जाने देता.

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इसके अलावा, खेत में हल्की सिंचाई करना भी बहुत फायदेमंद है. गीली जमीन का तापमान सूखी जमीन से ज्यादा होता है, जिससे मिट्टी में गर्माहट बनी रहती है और पाले का असर कम हो जाता है.

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अगर संभव हो तो दो लोग मिलकर एक लंबी रस्सी को फसल के ऊपर से फेरें जैसे रस्सी लगा कर फसल को हिलाएं. इससे पत्तों पर जमी ओस गिर जाती है.

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छोटे पौधों या नर्सरी को बचाने के लिए उन्हें प्लास्टिक या घास-फूस से ढक देना चाहिए. बस ध्यान रहे कि दक्षिण-पूर्व दिशा खुली हो ताकि सुबह की धूप पौधों को मिल सके.

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वैज्ञानिक तरीके से बचाव के लिए आप कुछ खास चीजों का स्प्रे कर सकते हैं. 15 लीटर पानी में 40 ग्राम घुलनशील सल्फर या 25 ग्राम ग्लूकोज घोलकर छिड़काव करें

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ऐसा करने से पौधों को मजबूती मिलती है. इसके अलावा, 20 ग्राम यूरिया प्रति लीटर पानी में घोलकर स्प्रे करने से भी पाले का असर कम होता है.

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फसलों को हर साल पाले से बचाने के लिए खेत की उत्तर-पश्चिम दिशा में वायुरोधक पेड़ जैसे शीशम, बबूल या आम लगाने चाहिए. ये पेड़ ठंडी हवाओं की सीधी मार को रोकते हैं.

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खेती में सही मैनेजमेंट और समय पर उठाए गए कदम ही आपकी फसल को भारी नुकसान से बचा सकते हैं.

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