5 May 2026
आजतचक एग्रीकल्चर डेस्क
बढ़ती गर्मी और चढ़ते तापमान के चलते पशुओं को भी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
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इन परेशानियों में एक परेशानी ऐसी भी है जो पशुओं से ज्यादा पशुपालकों को मुश्किल में डाल देती है.
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मई-जून की गर्मियों में हरे चारे की बहुत कमी हो जाती है. हर साल ही हरे चारे के लिए पशुपालकों को जूझना पड़ता है.
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एक्सपर्ट की मानें तो बरसीम, जई और रिजका चारा गर्मियों में दूसरे हरे चारे के मुकाबले थोड़ा आसानी से मिल जाता है.
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चारा वैज्ञानिक ने किसानों को सलाह देते हुए कहा है कि किसान चारे की फसल के बीज बेचकर भी अपनी इनकम बढ़ा सकते हैं.
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मई-जून में पशुओं के लिए हरे चारे की कोई कमी ना रहे इसके लिए समय रहते बुवाई शुरू कर दें.
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खासतौर पर ज्वार, बाजरा, लोबिया और मक्का की बुवाई कर अच्छा पौष्टिक चारा मिल जाता है.
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घर पर भी हरे चारे से हे और साइलेज बड़ी ही आसानी से बना सकते हैं. जैसे पतले तने वाले चारे की फसल को पकने से पहले ही काट लें.
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उसके बाद तले के छोटे-छोटे टुकड़े कर लें. उन्हें तब तक सुखाएं जब तक उनमे 15 से 18 फीसद तक नमी ना रह जाए.
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कई बार ज्यादा लम्बे वक्त तक सुखाने के चलते भी चारे में फंगस की शिकायत आने लगती है.
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चारे का तना टूटने लगे इसके बाद इन्हें अच्छी तरह से पैक करके इस तरह से रख दें कि चारे को बाहर की हवा न लगे.
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