31 Dec 2025
आजतक एग्रीकल्चर डेस्क
कपूर का पौधा सिर्फ पूजा-पाठ में इस्तेमाल होने वाला पौधा नहीं है, बल्कि ये एक सदाबहार औषधीय और वायुविशुद्धिकर पौधा भी है.
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इसके पत्तों और लकड़ी से मिलने वाला सुगंधित कपूर ऐंटीबैक्टीरियल तथा कीट-रोधी गुणों के लिए जाना जाता है, जिससे घर के माहौल में ताज़गी बनी रहती है.
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बसंत से गर्मियों (फरवरी से मई) के बीच कपूर के बीज गर्म मिट्टी में जल्दी अंकुरित होते हैं, इसलिए यह पौधा लगाने का सबसे अच्छा समय है.
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आप नर्सरी से ताज़ा कपूर का पौधा खरीद सकते हैं, या बीज/कटिंग से भी शुरू कर सकते हैं. दोनों तरीकों से यह आसानी से बढ़ता है.
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कपूर के पौधे को नमी वाली या रेतीली मिट्टी पसंद है. इसमें कोकोपीट, गोबर खाद, वर्मीकम्पोस्ट जैसी चीजें मिलाने से पौधा और अच्छा बढ़ता है. अगर आपके पास बगीचा नहीं है, तो बड़े साइज़ का गमला या ग्रो बैग लें जिसमें जड़ें फैल सकें.
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बीज को 1 से 1.5 सेमी गहराई में रखें और हल्का पानी दें. अंकुरण के लिए मिट्टी को थोड़ी नमी पर ही रखें.
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कपूर को अच्छे विकास के लिए धूप की ज़रूरत होती है, प्रतिदिन थोड़ा-बहुत सूरज मिलना पौधे को मजबूती देता है. मिट्टी को हल्का नम रखें, पर जलभराव नहीं होने दें.
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वसंत से पतझड़ तक हर 2–4 सप्ताह में संतुलित खाद देने से पौधे की ग्रोथ और सुगंध बेहतर होती है.
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