03 Feb 2026
आजतक एग्रीकल्चर डेस्क
पशुपालन से जुड़ें लोगों के लिए डेयरी का गंदा पानी एक बड़ी परेशानी है. इन कचरों की वजह से साफ-सफाई की समस्या भी बनी रहती है.
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कृषि-एक्सपर्ट ने इस समस्या का समाधान बताया है. दरअसल, डेयरी से निकलने वाला गीला कचरा नेपियर घास के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं.
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नेपियर घास की बड़ी खासियत है कि वह जलजमाव वाली जमीन में भी अच्छी तरह से उगती है. जहां पानी लगे, वहां भी यह घास अच्छा उत्पादन देती है.
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नेपियर घास का फायदा डेयरी किसान आसानी से उठा सकते हैं. डेयरी के गंदे पानी सिंचाई में कर सकते हैं.
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आईसीएआर के मुताबिक, डेयरी किसान 20 दिनों तक गंदे पानी को इकट्ठा करें, फिर उसे किसी नाली के जरिये नेपियर के खेत में डाल दें.
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अगर खेत में पानी की कमी हो या सिंचाई की जल्द जरूरत हो तो डेयरी के गंदे पानी का अंतराल घटा भी सकते हैं. इससे नेपियर घास में तेज ग्रोथ होती है.
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एक्सपर्ट ने पशुओं के लिए नेपियर को सबसे क्वालिटी वाली घास माना है. रिसर्च में पता चला है कि इस घास में 13-14 परसेंट प्रोटीन पाया जाता है.
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इस प्रोटीन से पशुओं का दूध बढ़ता है, रोगों से लड़ने की क्षमता में वृद्धि होती है और सेहत अच्छी रहती है.
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नेपियर घस अधिक उगाने से बाजार से चारा खरीदने का खर्च कम होगा. आर्थिक रूप से देखें तो डेयरी का गंदा पानी और नेपियर घास का उत्पादन बहुत लाभदायक है.
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इतना ही नहीं, सिंचाई का खर्च बचने के साथ ही रासायनिक खादों पर होने वाला खर्च भी बचता है.
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