गर्मियों में बीमार होने से बचेंगे पशु, नहीं होगी दूध की कमी, अभी करें ये तैयारी
21 Feb 2026
आजतक एग्रीकल्चर डेस्क
बढ़ती गर्मी और लू के थपेड़े केवल इंसानों को ही नहीं, बल्कि बेजुबान पशुओं को भी बीमार कर सकते हैं.
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गर्मी के मौसम में अक्सर गाय-भैंस बीमार पड़ जाते हैं और दूध उत्पादन भी घट जाता है. ऐसी स्थिति से बचने के लिए पशु चिकित्सक ने कुछ खास टिप्स दिए हैं.
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गर्मी आने से पहले ही गाय-भैंस के रहने की जगह को दुरुस्त कर लें. जहां पशु बंधे हों, वहां सीधी धूप बिल्कुल नहीं आनी चाहिए.
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शेड में ताजी हवा का रास्ता खुला हो और शेड के ऊपर घास-फूस या पुराने बोरे (टाट) डाल दें. इससे नीचे का तापमान कम रहेगा.
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गर्मी में पशुओं के शरीर को सबसे ज्यादा पानी की जरूरत होती है. पशु को दिनभर में कम से कम 3-4 बार साफ और ताजा पानी पिलाएं.
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पानी की कमी होने पर पशुओं का शरीर कमजोर पड़ने लगता है और दूध की मात्रा अचानक घट जाती है.
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सुबह और शाम के ठंडे समय में पशुओं को चराने ले जाएं. इससे वे मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहते हैं. इससे उनका पाचन तंत्र ठीक से काम करता है और शरीर में सुस्ती नहीं आती.
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अगर गाय या भैंस गाभिन है, तो गर्मी के महीनों में उसकी देखभाल बहुत ज्यादा करें. गर्भवती पशु को तेज धूप और उमस से बचाकर रखना बहुत जरूरी है, वरना गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है.
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उन्हें समय पर ताजा पानी और पौष्टिक चारा देने में कोई लापरवाही न बरतें. सही देखभाल मिलने से होने वाला बच्चा भी स्वस्थ पैदा होता है और बाद में पशु की दूध देने की क्षमता भी बढ़िया रहती है.
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हर रोज गोबर और कचरे की सफाई करें और गीली जगह को सूखने दें. इस मौसम में मक्खी और मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है जो पशुओं में बीमारियां फैलाते हैं.
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गर्मी के मौसम में हरा चारा, सूखा भूसा और दाना (संतुलित आहार) मिलाकर देते रहें. पौष्टिक खाना मिलने से पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहती है.
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धूप से बचाकर रखने पर पशुओं का शारीरिक तापमान संतुलित रहता है और वे शांत होकर जुगाली करते हैं, जिससे दूध उत्पादन प्रभावित नहीं होता.