29 Jan 2026
आजतक एग्रीकल्चर डेस्क
ब्रोकली एक क्रूसिफेरस सब्जी है. इसमें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. इससे कई शारीरिक लाभ भी मिलते हैं.
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ब्रोकली आज सिर्फ शहरों तक सीमित सब्जी नहीं रह गई है, बल्कि यह आय बढ़ाने का एक बेहतर विकल्प बन सकती है.
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ब्रोकली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी खेती किसान साल में 4 बार तक कर सकते हैं. कम समय में तैयार होने वाली यह फसल कम लागत में अच्छा मुनाफा दे सकती है.
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शहरी और कस्बाई बाजारों में ब्रोकली की कीमत सामान्य सब्जियों की तुलना में अधिक रहती है, जिससे किसानों को बेहतर मुनाफा मिलता है.
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ब्रोकली की खेती के लिए सबसे पहले नर्सरी तैयार कर लेना चाहिए. बीजों को पहले नर्सरी में बोया जाता है. लगभग 25 से 30 दिनों में जब पौधे तैयार हो जाते हैं, तब उन्हें खेत में रोपाई के लिए लगाया जाता है.
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ब्रोकली की अच्छी पैदावार के लिए भुरभुरी और जल निकास वाली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है, जिसमें गोबर की सड़ी हुई खाद या जैविक खाद का प्रयोग करने से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बढ़ते हैं.
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ब्रोकली की फसल को अधिक पानी की जरुरत नहीं होती, लेकिन समय-समय पर सिंचाई जरूर करें.
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रोपाई के बाद और फूल बनने के समय खेत में नमी बनाए रखना आवश्यक होता है. कीट और रोगों से बचाव के लिए संतुलित मात्रा में जैविक कीटनाशकों का उपयोग करें.
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सही देखभाल के साथ 70 से 80 दिनों में ब्रोकली की फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है. जिसमें लागत खर्च लगभग 25 हजार प्रति एकड़ लगती है और मुनाफा एक लाख तक होता है.
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