29 Jan 2026
आजतक एग्रीकल्चर डेस्क
केले के छिलकों को बेकार समझकर फेंकने के बजाय उसे खाद बनाने में उपयोग करना चाहिए. कृषि एक्सपर्ट्स की मानें तो यह गार्डन और खेतों में पेड़-पौधों के लिए किसी जादू से कम नहीं होगा.
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केले के छिलकों में पौटेशियम फल से भी ज्यादा होता है. साथ ही इसमें कैल्शियम, जिंक, मैग्नीशियम और ओमेगा फैटी एसिड जैसे पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो पौधों के विकास के लिए अनिवार्य हैं.
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इस लिक्विड खाद को बनाने के लिए घर में बेकार पड़ी बाल्टी या खेतों के लिए बड़े ड्रम को आधा पानी से भर लें. फिर केले के छिलकों को हर दिन इसमें डालते रहें.
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लगभग 24 घंटे के भीतर पानी का रंग धीरे-धीरे काला होने लगता है. पानी और पौटेशियम के बीच होने वाली रासायनिक प्रतिक्रिया के कारण पानी का रंग काला पड़ने लगता है.
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एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि इस घोल में लगभग आधा किलो चूना मिला दें. चूना न केवल मिट्टी की अम्लता (Acidity) को कम करता है बल्कि उसके pH लेवल को भी बैलेंस करता है.
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करीब दो दर्जन छिलके डालने के साथ 10-15 दिन बीत जाएं, तब छिलकों को छानकर अलग कर लें. अब शक्तिशाली लिक्विड खाद तैयार है.
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यह लिक्विड खाद पौधों के लिए ‘इम्युनिटी बूस्टर’ का काम करती है. जिन पौधों में फूल नहीं आ रहे थे, वहां कलियां खिलने लगेंगी. साथ ही मिट्टी अधिक उपजाऊ बनाता है.
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खेतों में इस्तेमाल करने पर फसल की गुणवत्ता और वजन दोनों में 10 गुना तक सुधार हो सकता है.
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अगर संभव हो, तो इस घोल में थोड़ा सा गोमूत्र भी मिलाया जा सकता है. हालांकि, यह वैकल्पिक है, लेकिन इसे मिलाने से खाद की शक्ति और अधिक बढ़ जाती है.
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