केले के पेड़ की पत्तियां काली पड़ रही हैं? तुरंत करें ये रामबाण इलाज
13 Feb 2026
आजतक एग्रीकल्चर डेस्क
केले की रोपाई तो आसानी से की जा सकती है, लेकिन इसकी देखभाल में चूक हो गई तो फसल बर्बाद हो सकती है.
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केले के पेड़ में पनामा विल्ट, सिगाटोका (पत्ती धब्बा) और तना गलन जैसे प्रमुख रोग लग जाते हैं तो केले की फसल बर्बाद हो जाती है.
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केले मे पीले सिगाटोका रोग होने पर पत्तियों पर छोटे, पीले धब्बे दिखने लगते है. जिसके कारण पत्तियां कमजोर होकर सूखने लगती हैं. पत्ते गिरने लगते हैं.
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काला सिगाटोका, पीले सिगाटोका की तुलना में अधिक आक्रामक रोग होता है. इसके लक्षणों में पत्तियों पर बड़ी, काली धारियां दिखने लगती हैं.
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यह रोग लगने से 40-45 प्रतिशत फसल बर्बाद हो जाती है और किसान को काफी नुकसान होता है.
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केले के पेड़ में लगने वाला पनामा विल्ट एक गंभीर मृदा-जनित फंगल रोग है. इसमें पत्तियों के किनारे पीले पड़ने लगते है और तने के निचले हिस्से के फटने लगते हैं.
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इस रोग को नियंत्रित करने के लिए साइफर मेथीन दवा को फसलों में लगभग 2-3 बार छिड़काव किया जाता है. तब यह नियंत्रित हो पता है.
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दवा में निरमा का मिश्रण करके जरूर छिड़काव करें. ताकि दवा का असर पत्तियों पर रहे और रोग न लगने पाए.
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एक बीघा केले की फसल में इस दवा का छिड़काव करने के लिए मात्र ₹200 से ₹250 का खर्च आता है और इससे फसल आसानी से बच जाती है.