18 June 2026
आजतक एग्रीकल्चर डेस्क
घरों में सबसे ज्यादा लगाए जाने वाले पौधों में एलोवेरा का नाम शामिल है. यह पौधा कम पानी और कम देखभाल में भी आसानी से बढ़ जाता है, लेकिन कुछ छोटी-छोटी गलतियां इसकी सेहत पर भारी पड़ सकती हैं.
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एलोवेरा अपनी पत्तियों में पानी जमा करके रखता है. ऐसे में बार-बार पानी देने से जड़ों में सड़न शुरू हो सकती है. इसका असर पीली, मुलायम और झुकती हुई पत्तियों के रूप में दिखाई देता है. पौधे को तभी पानी दें जब मिट्टी की ऊपरी परत पूरी तरह सूख जाए.
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अगर गमले या मिट्टी में पानी निकलने की उचित व्यवस्था नहीं है, तो जड़ों के आसपास नमी जमा हो जाती है. इससे पौधे का विकास रुक सकता है. एलोवेरा के लिए अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी और ड्रेनेज होल वाला गमला सबसे बेहतर माना जाता है.
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एलोवेरा को अच्छी रोशनी पसंद होती है. कम रोशनी में रखने पर इसकी पत्तियां पीली पड़ सकती हैं और पौधा कमजोर होकर लंबा खिंचने लगता है. इसे ऐसी जगह रखें जहां रोजाना 6 से 8 घंटे तक अप्रत्यक्ष धूप मिल सके.
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एलोवेरा अचानक होने वाले बदलावों को पसंद नहीं करता. छांव से सीधे तेज धूप में रखने या एसी, हीटर और ठंडी हवा के पास रखने से पौधे पर तनाव बढ़ सकता है. किसी नई जगह पर शिफ्ट करते समय उसे धीरे-धीरे वातावरण के अनुसार ढालना चाहिए.
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एलोवेरा को ज्यादा खाद की जरूरत नहीं होती, लेकिन लंबे समय तक एक ही गमले में रहने से मिट्टी में पोषक तत्व कम हो सकते हैं. इससे पौधे की बढ़वार धीमी हो जाती है और पत्तियां फीकी पड़ने लगती हैं. साल में एक-दो बार हल्की मात्रा में संतुलित खाद देना फायदेमंद हो सकता है.
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