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'दिल से अपनाया इस्लाम, पांच वक्त का नमाजी हूं', शामली के आयुष मलिक ने चुप्पी तोड़ी, चांदनी से निकाह पर कही ये बात

यूपी के शामली जिले में करोड़ों की संपत्ति और जबरन धर्मांतरण के आरोपों के बीच मुख्य युवक आयुष मलिक उर्फ मोहम्मद अली ने सामने आकर अपनी चुप्पी तोड़ी है. आयुष ने इन दावों को खारिज करते हुए इसे दबाव मुक्त और पूरी तरह अपनी आंतरिक सोच पर आधारित व्यक्तिगत यात्रा

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शामली के आयुष मलिक बना मोहम्मद अली (Photo- Screengrab)
शामली के आयुष मलिक बना मोहम्मद अली (Photo- Screengrab)

उत्तर प्रदेश के शामली जिले में कथित जबरन धर्मांतरण और करोड़ों रुपये की संपत्ति हड़पने की साजिश का एक बेहद पेंचीदा मामला सामने आया है. इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में रहे स्थानीय युवक आयुष मलिक उर्फ मोहम्मद अली ने खुद सामने आकर पुलिस जांच के बीच स्थिति स्पष्ट की है. आयुष मलिक ने अपनी मर्जी से गूगल, यूट्यूब और डिजिटल स्रोतों से प्रेरित होकर बिना किसी बाहरी दबाव के इस्लाम धर्म स्वीकार करने की बात कही है. यह कदम उन्होंने कंधे की चोट के इलाज के दौरान एक फिजियोथेरेपिस्ट चांदनी कुरैशी के संपर्क में आने और मानसिक शांति की तलाश के बाद उठाया.

चोट के इलाज से शुरू हुआ सफर

आयुष मलिक ने सिलसिलेवार ढंग से अपनी इस यात्रा के बारे में बात की. उन्होंने बताया कि उन्हें कंधे की चोट (लिगामेंट टियर) थी. इसी के इलाज के दौरान वे अपनी फिजियोथेरेपिस्ट के संपर्क में आए थे. धीरे-धीरे थेरेपिस्ट के मुस्लिम मित्रों और उनके परिवार से आयुष की जान-पहचान बढ़ती चली गई.

इंटरनेट और यूट्यूब का मिला सहारा

धार्मिक बदलाव को लेकर आयुष ने अपना नजरिया साफ रखा. उन्होंने कहा कि यह कोई महज औपचारिक प्रक्रिया या बाहरी दिखावा नहीं है, बल्कि यह इंसान के भीतर से होना चाहिए. वे खुद से नई चीजें सीखने के शौकीन थे. यूट्यूब पर डॉ. इसरार अहमद जैसे विचारकों के वीडियो देखकर इस्लाम पर उनकी समझ मजबूत हुई.

कुरान की आयतों से मिली राहत

आयुष ने साझा किया कि शुरुआती दौर में उन्हें ब्लड प्रेशर (बीपी) बढ़ने और हाथ कांपने जैसी गंभीर शारीरिक परेशानियां होने लगी थीं. इस दौरान उन्होंने यूट्यूब के माध्यम से कुरान की आयतें पढ़ना शुरू किया. इन आयतों के पाठ से उन्हें आंतरिक ताकत मिली और शारीरिक तकलीफें धीरे-धीरे कम होने लगीं.

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सुनियोजित रैकेट के आरोपों को नकारा

देश भर में चलने वाले कथित धर्मांतरण रैकेट्स और यूपी एटीएस (UP ATS) की जांच को लेकर आयुष ने खुद को पूरी तरह अलग बताया. आयुष ने दो टूक शब्दों में कहा कि देश में दिखाए जा रहे किसी भी बड़े रैकेट से उनका दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने गूगल और डिजिटल स्रोतों से खुद सीखकर धर्म बदला है. बकौल आयुष- वह न तो परिवार को छोड़ सकते हैं और न ही चांदनी को. चांदनी के परिवार को गलत समझा जा रहा है. उन्होंने इस्लाम में लाने के लिए मुझे इन्फ़्लुएंस नहीं किया.

पिता के आरोप और पुलिसिया कार्रवाई

दूसरी तरफ, आयुष के पिता देवराज ने सदर कोतवाली में तहरीर देकर इसे करोड़ों की संपत्ति पर कब्जा करने का षड्यंत्र बताया है. पिता का आरोप है कि आयुष का नाम मोहम्मद अली रखकर उसे फंसाया गया है. पुलिस ने इस मामले में आयुष की पत्नी चांदनी, उसके पिता इस्लाम और मौलानाओं सहित 10 लोगों पर मुकदमा दर्ज कर कुछ गिरफ्तारियां की हैं.

समाज में तीखी प्रतिक्रिया और आक्रोश

इस मामले को लेकर शामली में जाट और ब्राह्मण समाज के लोगों ने 'चौपाल' में तीखा आक्रोश जताया है. समाज के लोगों का कहना है कि आयुष को हिंदू धर्म में वापस आ जाना चाहिए. यदि वह घर वापसी नहीं करता है, तो उसे बिरादरी और परिवार की संपत्ति से पूरी तरह बेदखल कर देना चाहिए.

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आयुष का बड़ा दावा 

करोड़ों की संपत्ति और जबरन धर्मांतरण के आरोपों के बीच आयुष मलिक ने मीडिया के सामने आकर बड़ा दावा किया है. बड़े दवा कारोबारी देवराज मलिक के बेटे आयुष ने जबरन धर्म परिवर्तन के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने बिना किसी बाहरी दबाव के, अपनी स्वेच्छा से इस्लाम स्वीकार किया है. बकौल आयुष- वह न तो परिवार को छोड़ सकते हैं और न ही चांदनी को. 

आयुष के अनुसार, वे पिछले 13 वर्षों से इस्लाम को समझ रहे थे और चार साल पहले ही जिम ट्रेनर चांदनी कुरैशी से निकाह कर चुके थे. बहन की शादी न होने के कारण उन्होंने यह बात छिपाकर रखी थी. अब वे पांच वक्त की नमाज पढ़ते हैं और सुन्नत के तहत दाढ़ी रखते हैं. दूसरी तरफ, उनके पिता ने चांदनी, उसके परिवार के 6 सदस्यों और 3 मौलवियों पर जबरन धर्मांतरण और अवैध वसूली की एफआईआर (FIR) दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस ने चांदनी और उसके पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. 

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इनपुट- अरविंद ओझा और शरद मलिक
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