ब्रिटेन की एक 21 साल की स्टूडेंट ने करीब 35 लाख रुपये (30 हजार पाउंड) का कर्ज लेकर एक अच्छी यूनिवर्सिटी से साइकोलॉजी में डिग्री हासिल की. इसके बाद उसने इस क्षेत्र में एक बढ़िया करियर शुरू करने के बजाय प्लंबर बनने की ट्रेनिंग शुरू कर दी. ऐसा करने के पीछे उसने जो वजह बताई वो चौंकाने वाली है.
डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन के ग्रेटर मैनचेस्टर के बोल्टन की रहने वाली हीना केराई ने एज हिल यूनिवर्सिटी से साइकोलॉजी की पढ़ाई पूरी की. फिलहाल वह सप्ताह में दो दिन स्पेशल एजुकेशनल नीड्स टीचिंग असिस्टेंट के तौर पर काम करती हैं, ताकि अपने एजुकेशन लोन का कुछ हिस्सा चुका सके.
इसके साथ ही वह प्लंबिंग का कोर्स भी कर रही हैं, जिसकी फीस करीब 5,500 पाउंड है. इस कोर्स में उनके माता-पिता आर्थिक मदद कर रहे हैं.करीब 35 लाख रुपये के कर्ज लेकर यूनिवर्सिटी से डिग्री लेने के बाद अब हीना प्लंबर बनने की ट्रेनिंग ले रही हैं. उनकी सबसे बड़ी वजह है- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI).
हीना का मानना है कि आने वाले समय में AI कई तरह की नौकरियों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन प्लंबिंग जैसे तकनीकी और हाथ से किए जाने वाले कामों की जरूरत हमेशा बनी रहेगी.
हीना बताती हैं कि बचपन से ही उन्हें प्लंबिंग का माहौल देखने को मिला. उनके पिता विलाश केराई खुद ट्रेड्समैन हैं. वह अक्सर पिता के साथ काम पर जाती थीं और छोटे-मोटे कामों में मदद करती थीं.हीना कहती हैं कि पहले मैं सिर्फ पापा को औजार पकड़ाती थी और उनका काम देखती थी. लेकिन धीरे-धीरे लगा कि मैं खुद भी यह काम करना चाहती हूं.
पढ़ाई के दौरान बदला मन
स्कूल के दिनों में हीना को साइकोलॉजी विषय काफी पसंद था, इसलिए उन्होंने इसी विषय में डिग्री लेने का फैसला किया. हालांकि यूनिवर्सिटी के दूसरे साल में पहुंचने के बाद उन्होंने अपने भविष्य को लेकर दोबारा सोचना शुरू किया. उन्हें महसूस हुआ कि AI तेजी से कई क्षेत्रों में अपनी जगह बना रहा है. ऐसे में उन्होंने ऐसा पेशा चुनने का फैसला किया, जिसकी मांग हमेशा बनी रहे. तभी उन्होंने प्लंबिंग की ट्रेनिंग लेने का मन बना लिया.
पुरुषों से भरे कमरे में जाना लगता था डरावना
हीना बताती हैं कि शुरुआत में प्लंबिंग की क्लास में जाना उनके लिए आसान नहीं था. अक्सर वह किसी कमरे में अकेली महिला होती थीं और बाकी सभी पुरुष. वह कहती हैं कि शुरुआत में बहुत डर लगता था. लोग हैरानी से देखते थे कि एक लड़की यहां क्या कर रही है. लेकिन बाद में मैंने खुद से कहना शुरू किया कि मैं उनसे नहीं डरती, बल्कि शायद वे मुझसे असहज महसूस करते हैं. इस सोच ने मेरा आत्मविश्वास बढ़ाया.
भारतीय परिवार की बेटी होने का भी दबाव
हीना का कहना है कि भारतीय मूल की लड़की होने के कारण उन पर अलग तरह का सामाजिक दबाव भी था. कई एशियाई परिवारों में लड़कियों से डॉक्टर, बैंकिंग या कॉर्पोरेट जैसे पेशों में जाने की उम्मीद की जाती है.वह कहती हैं कि मैं सोचती थी कि परिवार क्या कहेगा, लेकिन मेरे माता-पिता ने हमेशा मेरा साथ दिया. उनका समर्थन मेरे लिए सबसे बड़ी ताकत है.
'मैं वैसी प्लंबर नहीं दिखती, जैसी लोग सोचते हैं'
हीना को अक्सर लोगों की धारणाओं का भी सामना करना पड़ता है. उनके मुताबिक, ज्यादातर लोग प्लंबर की कल्पना एक उम्रदराज, गंजे और गोरे पुरुष के रूप में करते हैं.
वह हंसते हुए कहती हैं कि मैं अक्सर पापा से कहती हूं कि मैं लोगों की सोच वाली 'टिपिकल प्लंबर' नहीं दिखती. जब लोग मुझे काम करते देखते हैं और मेरे पिता सिर्फ देख रहे होते हैं, तो उन्हें यकीन ही नहीं होता कि असली काम मैं कर रही हूं.
हीना इंस्टाग्राम पर अपनी प्लंबिंग ट्रेनिंग से जुड़े वीडियो और अनुभव शेयर करती हैं. वहां उन्हें काफी समर्थन मिलता है, लेकिन कई बार आलोचना और तंज भी सुनने पड़ते हैं. वह बताती हैं कि कुछ लोग बिना किसी जानकारी के यह साबित करने की कोशिश करते हैं कि मैं यह काम नहीं कर सकती. ज्यादातर ऐसे लोग होते हैं जिनकी प्रोफाइल तक नहीं होती.
महिलाओं के लिए बनना चाहती हैं प्रेरणा
हीना का मानना है कि महिला प्लंबर होने का एक फायदा यह भी है कि अकेले रहने वाली महिलाओं या बुजुर्गों को उनके आने पर ज्यादा सहज महसूस होता है. वह कहती हैं कि मैं चाहती हूं कि लड़कियां मुझे देखकर सोचें कि अगर मैं यह कर सकती हूं, तो वे भी कर सकती हैं.
अक्टूबर 2024 में प्लंबिंग कोर्स शुरू करने वाली हीना फिलहाल अपनी ट्रेनिंग जारी रखे हुए हैं. साइकोलॉजी में डिग्री लेने के बाद अब वह प्लंबिंग में करियर बनाने के साथ-साथ आगे की पढ़ाई पर भी विचार कर रही हैं. उनका मानना है कि बदलती दुनिया में कौशल ही सबसे बड़ी ताकत है और वही भविष्य की असली सुरक्षा भी.