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बिहार: नहीं थी पक्की सड़क, गांव में भरा था कीचड़, 3 किमी दूर कंधे पर बैठकर पहुंचे दूल्हे राजा

बिहार के बक्सर ज़िले में स्थित डुनमरांव गांव की. जहां कुछ दिनों पहले हुई बेमौसम बरसात हो जाने के कारण लोगों के समक्ष भारी संकट की स्थिति पैदा हो गई है. दो-तीन दिन पहले हुई एक शादी के दौरान एक दूल्हे को कंधे पर बैठाकर तकरीबन 3 किलोमीटर दूर तक कीचड़ और पानी में बचते बचाते हुए लेकर जाने का एक वीडियो सामने आया है.

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buxar news (प्रतीकात्मक फोटो) buxar news (प्रतीकात्मक फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 73 साल के बाद भी जिले के गांव में नहीं है सड़क
  • ये मामला जिले के डुमराव के चाप पंचायत के पुरैना गांव का

हम 21वीं सदी में हैं. देश की आजादी के 73 साल के बाद भी जिले में एक ऐसा गांव भी है जहां पहुंचने के लिए सड़क नहीं बनाई गई है. ऐसे में गर्मी के दिनों में तो लोगों को आवागमन की कोई समस्या नहीं होती लेकिन, हल्की बारिश में भी लोगों के सामने गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाती है. इस गांव में अगर किसी को शादी करनी हो तो वह गर्मी के दिनों में ही करना उचित समझते हैं.

हम बात कर रहे हैं बिहार के बक्सर ज़िले में स्थित डुनमरांव गांव की. जहां कुछ दिनों पहले हुई बेमौसम बरसात हो जाने के कारण लोगों के समक्ष भारी संकट की स्थिति पैदा हो गई है. दो-तीन दिन पहले हुई एक शादी के दौरान एक दूल्हे को कंधे पर बैठाकर तकरीबन 3 किलोमीटर दूर तक कीचड़ और पानी में बचते बचाते हुए लेकर जाने का एक वीडियो सामने आया है. पूछने पर स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि यह समस्या वर्षों से बनी हुई है लेकिन इस पर ना तो जनप्रतिनिधि और ना ही अधिकारी ध्यान देते हैं.

दरअसल, ये मामला जिले के डुमराव अनुमंडल मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर स्थित नचाप पंचायत के पुरैना गांव से जुड़ा हुआ है. जहां मुख्य सड़क से गांव में जाने के लिए कोई रास्ता नहीं है. सड़क की सुविधा नहीं होने के कारण लोग 3 किलोमीटर तक पैदल चलने को मजबूर हैं. लंबे समय से सड़क की मांग कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मांग पर कोई सुनवाई नहीं होती.

ग्रामीणों ने बताया कि हल्की बारिश होने के बाद कच्चे रास्ते से गाड़ियों का आवागमन बंद हो जाता है. ऐसे में लोगों को बचते-बचाते पैदल मुख्य सड़क तक आना पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि प्रखंड स्तरीय अधिकारी से लेकर जिले के वरीय अधिकारियों से लेकर जन प्रतिनिधियों तक कई बार इस संदर्भ में अनुरोध किया गया लेकिन उनकी तरफ से कोई पहल नहीं की गई.

हालांकि, पुरैनी गांव की दुर्दशा के बारे में बताते हुये समाजसेवी रविकांत ने कहा कि इस गांव जब तक बारिश नहीं होती तब तक ठीक है. अगर बारिश हो गई तो भगवान ही मालिक है. अगर गांव का कोई आदमी या औरत बीमार पड़ जाए तो सबसे पहले चार आदमी खोजे जाते हैं क्योंकि गांव का रास्ता पार करना है.

वहीं, गांव में कभी भी शादी बरसात में नहीं की जाती. अगर लड़के वाले तैयार नहीं हुए तो मजबूरी है. इस बार यही हुआ है. बेमौसम बारिश के कारण गांव की सड़क बर्बाद हो गई. ऐसे में दूल्हे को कंधे पर बिठाकर लाया गया है.

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