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लॉकडाउन के दौरान घाटी में Whatsapp क्लास से पढ़ रहे 600 से ज्यादा बच्चे

कश्मीर के पांच जिलों के 600 से ज्यादा बच्चे इस वॉट्सऐप स्कूल से पढ़ाई पूरी कर रहे हैं. ये पांच जिले हैं बांदीपोरा, बारामुला, बडगाम, गांदेरबल और कश्मीर की राजधानी श्रीनगर. ये बच्चे इस लॉकडाउन में फिलहाल स्कूल को मिस नहीं कर रहे हैं.

Whatsapp क्लास से पढ़ते घाटी के बच्चे. Whatsapp क्लास से पढ़ते घाटी के बच्चे.

  • 29 टीचर्स हर दिन लेते हैं इन बच्चों की क्लास
  • माता-पिता को भी भेजे जाते हैं शिक्षाप्रद वीडियो

पूरी दुनिया कोरोना की वजह से लॉकडाउन में है. लोग घरों में हैं. सबकुछ बंद है. क्या बड़े और क्या बच्चे. ऐसा ही हाल है घाटी का. यानी धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर का. कश्मीर भी कोरोना वायरस की वजह से लगाए गए लॉकडाउन की वजह से बंद है. स्कूल बंद हैं इसलिए बच्चे भी घर पर हैं. ऐसे में बच्चों की पढ़ाई का क्या होगा? पढ़ाई जारी है. सबकुछ वॉट्सऐप से.

कश्मीर के पांच जिलों के 600 से ज्यादा बच्चे इस व्हाट्सएप स्कूल से पढ़ाई पूरी कर रहे हैं. ये पांच जिले हैं बांदीपोरा, बारामुला, बडगाम, गांदेरबल और कश्मीर की राजधानी श्रीनगर. ये बच्चे इस लॉकडाउन में फिलहाल स्कूल को मिस नहीं कर रहे हैं. क्योंकि, इस वॉट्सऐप स्कूल को दो गैर-सरकारी संस्थान मिलकर चला रहे हैं.

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इन गैर-सरकारी संस्थाओं का नाम है जम्मू-कश्मीर एसोसिएशन ऑफ सोशल वर्कर्स (JKASW) और कोशिश. कोशिश संस्था अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बच्चों के लिए काम करने वाली संस्था क्राई (CRY-Child Rights and You) के साथ काम करती है. इस वॉट्सऐप स्कूल में भी क्राई ने कोशिश को मदद की है.

jk-1_050720073419.jpgWhtasapp क्लास से पढ़ाई करते कश्मीर के बच्चे. ये तरीका काफी पसंद किया जा रहा है.

कोशिश की तरफ से 13 और जम्मू-कश्मीर एसोसिएशन ऑफ सोशल वर्कर्स की तरफ से 16 टीचर्स हर दिन इन 600 से ज्यादा बच्चों की वॉट्सऐप क्लास लेते हैं. वॉट्सऐप क्लास करने वाले ज्यादातर बच्चे गरीब परिवारों से हैं. और अपने परिवार से पढ़ाई करने वाली पहली पीढ़ी के बच्चे हैं.

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इनमें से कई बच्चों को तो हाल ही में बाल मजदूरी से मुक्त कराया गया है. फिर इन्हें स्कूलों में दाखिला दिलाया गया था. इस काम में इन दोनों गैर-सरकारी संस्थाओं ने मदद की थी. इन बच्चों के चाइल्ड एक्टिविटी सेंटर्स में रखा गया है. ताकि वे सुरक्षित रहें और पढ़ाई कर सकें.

jk-2_050720073459.jpgटीचर किताबों के जरिए भी इस तरह से पढ़ा सकते हैं.

क्राई की सीईओ पूजा मारवाह ने कहा कि कोरोनावायरस महामारी के दौरान अगर सबसे ज्यादा परेशान कोई है तो वे बच्चे हैं. ऐसी हालात में बच्चों को शिक्षा मिलती रहे और वे ऐसे क्रिएटिव क्लासेस में सक्रिय भागीदारी करें इसके लिए हम मदद करते हैं. वॉट्सऐप क्लासेस के जरिए हम इन गरीब और सुविधाओं से वंचित बच्चों को बेहतर शिक्षा दे पाते हैं. साथ ही लॉकडाउन में उनका मन लगा रहता है.

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वॉट्सऐप क्लासेस से पहले बच्चों के माता-पिता और केयरटेकर्स को बताया गया. स्मार्टफोन, स्पीकर और इंटरनेट की व्यवस्था की गई. इसके बाद बच्चों, टीचर्स और पैरेंट्स का वॉट्सऐप ग्रुप बनाया गया. बच्चों को मोबाइल से पढ़ने में आसानी हो इसके लिए सबजेक्ट को ऑनलाइन के हिसाब से थोड़ा बदला गया और सुधारा गया.

jk-3_050720073535.jpgवीडियो कॉल के जरिए हो रही है पढ़ाई.

अब बच्चे सिलेबस के हिसाब से पढ़ाई कर रहे हैं. लाइफ स्किल एक्टिविटीज को वॉट्सऐप ऑडियो के जरिए बच्चों से कराया जाता है. ताकि सीखने के साथ-साथ उनका मनोरंजन होता रहे. यह सारी क्लासेज स्थानीय भाषा में होती हैं. वॉट्सऐप क्लास करने वाले ज्यादातर बच्चे 3 से 6 साल के हैं.

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कई बच्चों के माता-पिता को मनोरंजक और शिक्षाप्रद वीडियो भेजे जाते हैं. ताकि वे अपने बच्चों के उसे दिखाकर कुछ सीखा सकें. बाद में वॉट्सऐप ग्रुप पर फीडबैक दे सकें. शाब्रूजा चूंटीनार नाम के स्टूडेंट ने बताया कि वॉट्सऐप ग्रुप की वजह से मैं दुनिया से जुड़ी रहती हूं. मन लगता हैं पढ़ने में. मुझे पहली बार स्मार्टफोन चलाने के लिए मिला. मैं बहुत खुश हूं.

वॉट्सऐप ग्रुप में शामिल पैरेंट ब्रेनवार के रशीद गोजर ने कहा कि हमें बहुत खुशी है कि ऑनलाइन बच्चे कुछ सीख रहे हैं. उनका मन लगा रहता है. ऐसी व्यवस्था राज्य सरकार को भी करनी चाहिए. ताकि बच्चों की क्लासेस ऑनलाइन फिर से शुरू हो सकें.

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