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Internet की काली दुनिया Dark Web, जहां बिकती है लोगों की पर्सनल डिटेल्स और होते हैं 'अवैध काम'

What Is Dark Web: आपने कई बार हैकिंग से जुड़ी चर्चाओं में डार्क वेब का नाम सुना होगा. कहा जाता है कि ये इंटरनेट की वो काली दुनिया है, जहां कई 'अवैध काम' होते हैं. आपके जेहन कई बार इस दुनिया के बारे में जानने का ख्याल भी आता होगा. आज हम आपको इंटरनेट की इस दुनिया के बारे में कई जरूरी बातें बता रहे हैं.

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Dark Web तक कुछ स्पेशल ब्राउजर की मदद से ही पहुंचा जा सकता है
Dark Web तक कुछ स्पेशल ब्राउजर की मदद से ही पहुंचा जा सकता है

इंटरनेट हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है. किसी को कुछ सर्च करना हो या फिर एक छोटी पेमेंट करनी हो, सब कुछ इंटरनेट की मदद से हो रहा है. वैसे इंटरनेट की भी अपनी एक दुनिया है. हमारी रियल लाइफ की तरह ही इस दुनिया में भी बहुत कुछ होता है. इस दुनिया में एक शब्द Dark Web है. 

आपने कई बार इस शब्द के बारे में सुना होगा. मसलन डेटा लीक की चर्चा के बीच ये शब्द बहुत बार सुना या पढ़ा जाता है. इसे इंटरनेट की दुनिया का वो काला राज कहते हैं, जहां हमारा और आपका बहुत सा डेटा मौजूद होता है. इस डेटा को कभी कौड़ियों के भाव तो कभी हीरे की कीमत पर बेचा जाता है. 

तीन हिस्सों में है इंटरनेट की दुनिया

जिस तरह से हमारी दुनिया जमीन, आसमान और पानी तीन हिस्सों में बांटी हुई है, उसकी तरह से इंटरनेट की दुनिया भी है. यहां जो हम देख, पढ़ या सर्च कर रहे हैं, वो पूरी इंटरनेट की दुनिया का महज एक छोटा सा हिस्सा है. हमें जो कुछ इंटरनेट पर दिखता है, ये सब ओपन वेब या सर्फेस वेब का हिस्सा है. 

रिपोर्ट्स की मानें तो ये पूरे इंटरनेट का महज 5 परसेंट है. यानी आप गूगल, बिंग या किसी दूसरे सर्च इंजन पर जो कुछ सर्च कर रहे हैं, ये सब कुछ इंटरनेट की दुनिया का सिर्फ 5 परसेंट है. आप इन वेब पेज को इसलिए देख पाते हैं क्योंकि सर्च इंजन इन्हें इंडेक्स करते हैं. मगर इंटरनेट की दुनिया इन सब के कहीं ज्यादा बड़ी है. 

क्या होता है Deep Web? 

जैसे पृथ्वी की सतह के नीचे पानी की एक दुनिया होती है, उसी तरह से इंटरनेट की दुनिया में डीप वेब है. ये इंटरनेट का 90 परसेंट से ज्यादा हिस्सा है. कहा जाता है कि इंटरनेट का ये हिस्सा इतना बड़ा है कि कोई पता नहीं लगा सकता है कि यहां कितने ही वेब पेज हैं या वेबसाइट एक्टिव हैं.

आप इसे किसी विशालकाय समुद्र की तरह समझ सकते हैं, जिसमें गूगल और दूसरे सर्च इंजन महज एक मछली पकड़ने वाली नाव की तरह हैं. डीप वेब में ही आपको इंटरनेट की दुनिया का वो काला राज भी मिलेगा, जिसे लोग डार्क वेब कहते हैं.

बहुत बार डार्क वेब और डीप वेब को लोग एक ही समझते हैं, लेकिन ये दोनों अलग हैं. डीप वेब का बहुत सा हिस्सा लीगल और सुरक्षित माना जाता है. यहां आपको डेटा बेस से लेकर इंट्रानेट्स तक मिलेंगे. 

अगर आप ये सोच रहे हैं कि डीप वेब को आप कैसे यूज कर सकते हैं, तो संभव है कि आप इसे रोज इस्तेमाल कर रहे हों. डीप वेब टर्म उन वेब पेज के लिए यूज किया जाता है, जिन्हें सर्च इंजन आईडेंटिफाई नहीं करते हैं. वैसे तो इस पर ज्यादातर कंटेंट सेफ होता है और इसे यूजर्स की प्राइवेसी को बचाने के लिए हाइड रखा जाता है. 

Dark Web क्या है? 

डार्क वेब इंटरनेट की दुनिया का वो हिस्सा है, जहां तक आपका सर्च इंजन नहीं पहुंचता है. इन्हें स्पेशल वेब ब्राउजर से एक्सेस किया जा सकता है. इसका पोर्शन छोटा होता है. Kaspersky के मुताबिक इसे डीप वेब का हिस्सा माना जाता है.

जिस तरह से समुद्र की सतह और पानी ने नीचे कुछ हस्से तक तो हमारी पहुंच होती है, लेकिन एक हिस्सा ऐसा भी जहां तक अभी तक कोई नहीं पहुंचा है. डार्क वेब इंटरनेट की दुनिया का वही हिस्सा है. 

इस हिस्से तक बहुत कम लोगों की पहुंच है. यहां के वेब पेज को सर्च इंजन द्वारा इंडेक्स नहीं किया जाता है. डार्क वेब को बहुत खतरनाक माना गया है और यहां पर कई अवैध काम होते हैं.  

साइबर वर्ल्ड की ये दुनिया अवैध कामों का ठिकाना माना जाता है. कभी इस दुनिया में हैकर्स, लॉ इंफोर्समेंट ऑफिसर्स और साइबर क्रिमिनल्स का दबदबा होता था. हालांकि, एन्क्रिप्शन और The Onion Router जैसी नई टेक्नोलॉजी की मदद से लोग डार्क वेब तक पहुंच सकते हैं.

वैसे तो डार्क वेब का इस्तेमला गैरकानूनी नहीं है, लेकिन इसके कई खतरे होते हैं. यहां आप स्कैम, संदिग्ध सॉफ्टवेयर या सरकारी मॉनिटरिंग का शिकार हो सकते हैं. यही वजह है कि सामान्य यूजर्स को इंटरनेट की इस दुनिया से दूर रहने की सलाह दी जाती है. 

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