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TV की ये सेटिंग आपको जासूसी से बचाएगी, तुरंत करें बदलाव वर्ना पड़ेगा भारी

स्मार्टफोन की तरह स्मार्ट टीवी भी आपकी जासूसी कर सकता है. कई ऐसी खबरें देखने को मिली हैं. आम तौर पर लोग इसे हल्के में लेते हैं, लेकिन ये समस्या गंभीर है. कुछ सेटिंग्स में बदलाव करके आप इससे बच सकते हैं.

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स्मार्ट टीवी कैसे कर रहा जासूसी?
स्मार्ट टीवी कैसे कर रहा जासूसी?

क्या आपका स्मार्ट टीवी आपकी बातें सुन रहा है. यह सवाल अब सिर्फ शक नहीं, बल्कि एक बड़ा टेक कंसर्न बन चुका है. आजकल ज्यादातर स्मार्ट टीवी में वॉयस कंट्रोल, माइक्रोफोन और इंटरनेट कनेक्टिविटी होती है. यही फीचर्स जहां एक तरफ सुविधा देते हैं, वहीं दूसरी तरफ प्राइवेसी के लिए खतरा भी बन सकते हैं.

कई रिपोर्ट्स में सामने आया है कि स्मार्ट टीवी यूजर्स की वॉयस कमांड, देखने की आदत और यहां तक कि आसपास की आवाजों को भी रिकॉर्ड कर सकते हैं. कुछ कंपनियां इन डेटा का इस्तेमाल अपने सर्विस को बेहतर बनाने या पर्सनलाइज्ड ऐड दिखाने के लिए करती हैं.

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हालांकि कंपनियां कहती हैं कि यह सब यूजर की परमिशन से होता है, लेकिन ज्यादातर लोग सेटिंग्स को ठीक से समझते ही नहीं.

आपका टीवी आपको सुनता है!

अगर आप भी अपनी प्राइवेसी की थोड़ी भी परवाह करते हैं, तो एक बहुत आसान सेटिंग है जिसे बदलकर आप काफी हद तक अपने डेटा को सिक्योर कर सकते हैं. 

ज्यादातर स्मार्ट टीवी जैसे Samsung, LG, Sony या Android TV में वॉयस असिस्टेंट पहले से एक्टिव रहता है. इसका मतलब है कि टीवी हमेशा आपकी आवाज सुनने के लिए तैयार रहता है ताकि Hey Google या Alexa जैसे कमांड पर तुरंत रेस्पॉन्ड कर सके. लेकिन यही फीचर आपके आसपास की बातचीत को भी कैप्चर कर सकता है.

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इससे बचने के लिए आपको अपने टीवी की सेटिंग्स में जाकर Voice Recognition, Voice Control या Microphone Access को बंद करना होगा. कई टीवी में यह सेटिंग Privacy या Terms & Conditions सेक्शन के अंदर मिलती है. कुछ मामलों में आपको Viewing Information Services”ॉ या Interest-Based Ads जैसे ऑप्शन भी बंद करने पड़ सकते हैं.

बंद कर दें ऑटोमैटिक कंटेंट रिकॉग्निशन

टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि सिर्फ वॉयस कंट्रोल ही नहीं, बल्कि ACR यानी Automatic Content Recognition भी एक ऐसा फीचर है जो आपके देखने के पैटर्न को ट्रैक करता है.

यह फीचर यह जानता है कि आप कौन सा चैनल देख रहे हैं, कितनी देर देख रहे हैं और किस तरह का कंटेंट पसंद करते हैं. इसके आधार पर आपको ऐड्स दिखाए जाते हैं.

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अगर आप पूरी तरह से सेफ रहना चाहते हैं, तो ACR को भी बंद करना बेहतर है. हालांकि इससे आपको पर्सनलाइज्ड रिकमेंडेशन कम मिलेंगे, लेकिन आपकी प्राइवेसी ज्यादा सुरक्षित रहेगी.

माइक्रोफोन ऑफ रखें

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आप वॉयस फीचर का इस्तेमाल नहीं कर रहे हों, तो रिमोट के माइक्रोफोन बटन का इस्तेमाल ही न करें. अगर आपके टीवी में फिजिकल माइक्रोफोन है, तो उसे मैन्युअली ऑफ कर दें. कुछ लोग एक्स्ट्रा सेफ्टी के लिए कैमरा वाले टीवी पर टेप भी लगा देते हैं. हालांकि ज्यादातर टीवी बिना फ्रंट कैमरे के आते हैं. 

ध्यान रखने वाली बात यह है कि स्मार्ट टीवी भी एक तरह का इंटरनेट से जुड़ा डिवाइस है, ठीक वैसे ही जैसे आपका स्मार्टफोन. इसलिए इसमें भी वही खतरे हो सकते हैं जो फोन या लैपटॉप में होते हैं.

आज के समय में  और प्राइवेसी के बीच बैलेंस बनाना जरूरी है. एक छोटी सी सेटिंग बदलकर आप अपने घर की बातचीत को किसी अनचाहे डेटा सिस्टम का हिस्सा बनने से रोक सकते हैं. इसलिए अगली बार जब आप टीवी ऑन करें, तो एक बार उसकी प्राइवेसी सेटिंग जरूर चेक करें.

सेटिंग्स में जा कर ये भी चेक कर लें कि आपके स्मार्ट टीवी में अपडेट आ रहा है या नहीं. आम तौर पर तीन साल तक पैच मिलते हैं और इसे अपडेट करना जरूरी है. 

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