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रिसर्चर्स का कमाल! इस स्वेटर को पहनते ही बन जाएंगे 'Mr. India', हो जाएंगे गायब

आपने हैरी पॉटर मूवी देखी होगी, तो उसमें एक गायब होने वाला इनविजिबल क्लोक भी देखा होगा. इसे पहनने वाला शख्स किसी को नजर नहीं आता है. कुछ ऐसा ही एक प्रोडक्ट अब रियल लाइफ में आ गया है, जिसे पहनने वाला एआई कैमरों को चकमा दे सकता है. इस स्वेटर को यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड और फेसबुक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने मिलकर तैयार किया है.

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हैरी पॉटर के इनविजिबल क्लोक की तरह काम करता है ये स्वेटर
हैरी पॉटर के इनविजिबल क्लोक की तरह काम करता है ये स्वेटर

बहुत से लोगों ने हैरी पॉटर मूवी देखी होगी. जादुई दुनिया की कहानी बताती इस फिल्म में कई कमाल की चीजें के देखने को मिलती हैं, जिन्हें लोग असल जीवन में भी हासिल करना चाहते हैं. ऐसी ही एक चीज अदृश्य होने वाला चोगा (Cloak of invisibility) होता है. इसे पहनने वाला शख्स मूवी में गायब हो जाता है. 

अगर हम कहें कि रियल लाइफ में भी किसी ने ऐसा एक चोगा बना लिया गया है. जिसे पहनकर आप भी गायब हो सकते हैं. शायद आपको इस बात पर यकीन ना हो, लेकिन वास्तव में रिसर्चर्स ने ऐसा कर दिखाया है.

कैसे काम करता है ये स्वेटर? 

मगर इसे पहन पर आप असल दुनिया में गायब नहीं होंगे बल्कि वर्चुअल वर्ल्ड में ये आपकी मदद करेगा. इसकी मदद से आप मॉडर्न फेस डिटेक्शन मैकेनिज्म को धोखा दे सकते हैं. दरअसल, यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड ने फेसबुक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ मिलकर एक इनविजिबल क्लोक तैयार किया है, जो एक पुलओवर है.

इसकी मदद से आप अपने चेहरे को मॉडर्न AI कैमरे से ढक सकते हैं. हालांकि, इस स्टडी का मुख्य लक्ष्य मशीन लर्निंग सिस्टम में वल्नरेबिलिटीज को खोजना था. इसमें पता चला कि एक यूनिक प्रिंट के कपड़ों को पहनने पर AI कैमरे उन्हें देख नहीं पाते हैं.

एआई कैमरों के बचने के लिए तैयार किए गए स्वेटर में स्टे-ड्राई microfleece लाइनिंग और ऐड्वर्सल पैटर्न का इस्तेमाल किया गया है, जिससे एआई कैमरा कन्फ्यूज हो जाता है. 

क्या है रिसर्चर्स का कहना?

यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड, कम्प्यूटर साइंस के आधिकारिक पेज पर एक रिसर्चर्स ने इस बारे में जानकारी दी है. उन्होंने बताया, 'ये स्टाइलिश पुलओवर इस सर्दी खुद को गर्म रखने का बेहतरीन तरीका है.' रिसर्चर्स ने इस पूरे प्रॉसेस को भी एक्सप्लेन किया है, जिसकी वजह से एआई कैमरा पुलओवर पहनने वाले को डिटेक्ट नहीं कर पाता है. 

रिसर्चर्स के मुताबिक, टीम COCO डिटेक्शन डेटासेट से ईमेज लोड करती है और उन्हें डिटेक्टर से पास करती है. जैसे ही कोई शख्स डिटेक्ट होता है, उस शख्स के ऊपर एक पैटर्न बन जाता है. 

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