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कुत्ता नहीं अब कॉकरोच पकड़ेगा अपराधी... वैज्ञानिकों ने विकसित की तकनीक

वैज्ञानिकों ने Cyborg कॉकरोच तैयार कर लिया है. इसका इस्तेमाल कई जगहों पर किया जा सकता है. इसको लेकर कहा गया है कि इस Cyborg कॉकरोच का इस्तेमाल सर्विलांस मिशन और दूसरे जगहों पर किया जा सकता है. इसको सर्च मिशन के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इसमें ज्यादा फंक्शनलिटी ऐड करने पर काम किया जा रहा है.

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Photo Credit: npj Flexible Electronics
Photo Credit: npj Flexible Electronics

टेक्नोलॉजी काफी तेजी से आगे बढ़ रही है. इस वजह से लोगों की लाइफस्टाइल भी बदल रही है. मशीन और ऑर्गेनिज्म के इंटीग्रेशन को लेकर काफी लंबे समय से बहस हो रही है. इसमें कई लोग चिंता जताते हैं कि ये लोगों पर हावी हो सकता है. 

लेकिन, अब वैज्ञानिकों ने इसके छोटे वर्जन को तैयार कर लिया है. इस इंटरमिक्स के जरिए Cyborgs इंसेक्ट को तैयार किया गया है. Cyborgs को कई जगहों पर इस्तेमाल किया जा सकता है. इसे अर्बन सर्च और रेस्क्यू में भी इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि, ये प्रयोग अभी काफी शुरुआती स्टेज में है.

कई जगहों पर आएगा काम

इस यूनिक मशीन से एनवायरमेंट को मॉनिटर किया जा सकता है. इसके अलावा मूवमेंट्स को भी ट्रैक किया जा सकता है. Cyborgs की मदद से प्राकृतिक आपदा के समय कॉर्डेनेटिंग रेस्क्यू और सर्च मिशन को भी अंजाम दिया जा सकता है. 

इसके बारे में npj Flexible Electronics में जानकारी दी गई है. इसमें बताया गया है कि वैज्ञानिकों ने इसकी उपयोगिता को वायरलेस लोकोमोशन कंट्रोल को रिचार्ज करके दिखाया. रिपोर्ट में बताया गया है कि इलेक्ट्रॉनिक्स में एडवांसमेंट की वजह से ऑर्गेनिज्म और मशीन का इंटीग्रेशन का बढ़ रहा है. 

रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि कम पावर लेने वाला सेमीकंडक्टर चिप के जरिए इस छोटे से Cyborg को तैयार किया गया है. इसको जापान के Center for Emergent Matter Science के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है. 

इसके लिए टीम ने पहले एक कॉकरोच का बैकपैक तैयार किया. इसको ऑर्गेनिज्म के नर्वस सिस्टम से जोड़ा गया है. इसका पावर आउटपुट पिछले डिवाइस से 50 गुना ज्यादा था. Cyborg कॉकरोच को अल्ट्राथीन सोलर सेल के जरिए तैयार किया गया है. ये इंसेक्ट के मूवमेंट को प्रभावित नहीं करता है. 

टीम ने दिखाया कि किस तरह वायरलेस सिग्नल का इस्तेमाल करके कॉकरोच को लेफ्ट या राइट डायरेक्शन में मूव किया जा सकता है. वायरलेस सिग्नल कॉकरोच के नर्वस सिस्टम से अचैट था. वैज्ञानिकों ने बताया कि सिग्नल को चार्ज बैटरी से 2.1 मिनट के लिए वायरलेसली ट्रांसमिट किया गया. इस पर वो और भी ज्यादा रिसर्च कर रहे हैं ताकि मूवमेंट के अलावा दूसरी फंक्शनलिटी को भी ऐड किया जा सके. 

 

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