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पैरालंपिक बैडमिंटन में भारत को प्रथम स्वर्ण पदक दिलाने वाले कौन हैं प्रमोद भगत?

जापान की राजधानी टोक्यों में जारी पैरालंपिक में भारतीय खिलाड़ी प्रमोद भगत ने बैडमिंटन में भारत को प्रथम स्वर्ण पदक दिलाया है. जिसके बाद प्रमोद भगत ने इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज कर लिया है.

प्रमोद भगत (फोटो क्रेडिट: गेटी इमेजेस) प्रमोद भगत (फोटो क्रेडिट: गेटी इमेजेस)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बैडमिंटन में भारत को प्रथम स्वर्ण पदक दिलाया
  • अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है

जापान की राजधानी टोक्यों में जारी पैरालंपिक में भारतीय खिलाड़ी प्रमोद भगत ने बैडमिंटन में भारत को प्रथम स्वर्ण पदक दिलाया है. जिसके बाद प्रमोद भगत ने इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज कर लिया है. प्रमोद भगत को 2019 में भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के द्वारा अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है.

स्वर्ण पदक विजेता प्रमोद भगत का जन्म ओडिशा के बरगढ़ जिले के अट्ताबीर गांव में 4 जून 1989 को हुआ था. प्रमोद भगत स्वर्गीय कैलाश भगत एवं माता स्वर्गीय कुशुना भगत के सुपुत्र हैं. भगत अपने भाइयों में सबसे बड़े हैं और उनसे तीन उनकी बड़ी बहने हैं. जिनकी शादी हो चुकी है. भगत कुल मिलाकर 6 भाई-बहन है. भगत के दोनों भाईयों का नाम अमोद भगत एवं शेखर भगत है.  

आजतक सांवददाता से प्रमोद भगत के छोटे भाई शेखर भगत ने बातचीत में बताया कि बड़े भइया को बचपन से ही खेल में बहुत रुची था. दुर्भाग्य से बचपन में ही वह पोलिया का शिकर हो गए. जिसके कारण परिवार में चिंता बढ़ गई थी. बड़े भइया को बैडमिंटन खेल में काफी दिलचस्पी थी. हालांकि. पैसों की कमी के कारण एक शटल खरीद कर उससे वह कई दिनों तक खेलते थे. 

प्रमोद भगत के गोल्ड जीतने पर लोगों ने मनाई खुशी
प्रमोद भगत के गोल्ड जीतने पर लोगों ने मनाई खुशी

शेखर ने विस्तार से बताया कि प्रमोद भइया के साथ मैं अभी भुवनेश्वर में रहता हूं. भइया ने जिले में आर्ट्स विषय को लेकर स्नातक तक पढ़ाई किए हैं. भइया पढ़ाई के साथ गांव से थोड़ा दूर स्थित पेलेयर क्लब में सामान्य रुप के लोगों के साथ बैडमिंटन खेलना शुरु किया. वहां मौजूद अन्य खिलाड़ियों ने भइया के खेल की तारीफ की और उनके साथ खेलना लगें. साथ ही साथ खिलाडियों ने भइया को राष्ट्रीय स्तर पर खेलने के लिए प्रोत्साहन दिए. शेखर ने बताया कि भइया ने सबसे पहले 2006 में एशियन पैराबैडमिंटन खेल में शानदार प्रदर्शन देकर मेडल अपने नाम किया. उसके बाद भइया ने और भी कड़ी मेहनत शुरु कर दी. 

शेखर ने बताया कि हालांकि, पापा भइया के खेलने को पसंद नहीं करते थे. पापा हमेशा कहते थे कि इस खेल में क्या रखा है. खेलना बंद करो और पूरा ध्यान पढ़ाई में लगाओ. अगर अच्छा पढ़ोगे तो अच्छी नौकरी मिलेगी. भइया दिन में पढ़ाई करते थे और रात में चोरी-छूपे बैडमिंटन खेल का अभ्यास करते थे. उस समय में सटल खरीदने का भी पूरा पैसा नहीं हो पाता था और दूसरों से लेना पड़ता था. जिसके लिए भइया को कई बार पापा से मार खाना पढ़ा था. 

प्रमोद भगत का मैच देखते परिवार वाले
प्रमोद भगत का मैच देखते परिवार वाले

शेखर ने बताया कि पापा राईस मील में ड्राईवर का काम किया करते थे. 2007 में पापा का देहांत हो गया. पापा के जाने के बाद परिवार को गरीबी और आर्थिक तंगी से जूजना पड़ा. इसका भइया के खेल पर पूरा असर पड़ा. कुछ दिनों के बाद पापा की गाड़ी को बेचकर गांव के पास भगत इलेक्ट्रिक दूकान खोला. दूकान पर हम तीनों भाई समय-समय पर बैठने लगे. आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ और भइया ने अपना खेल दोबारा जारी किया. 

शेखर ने कहा कि हम दो छोटे भईयों ने भइया को खेलने के लिए पूरा समय दिया. कड़ी मेहनत और निरतंर अभ्यास से पहले से बेहतर खेलने लगे. भइया को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का मौका मिला. भइया दिल्ली. बैंगलुरु एवं अन्य राज्यों में जाकर अपना दमदार प्रदर्शन दिए. जिसके बाद मानों कि पदक की बरसात होने लगी. आज हमारा भुवनेश्वर में स्थित क्वाटर का कमरा पूरी तरह से पदक से भरा है. 

प्रमोद भगत ने टोक्यो पैरालंपिक में जीता गोल्ड
प्रमोद भगत ने टोक्यो पैरालंपिक में जीता गोल्ड

अर्जुन अवॉर्ड से भी हो चुके हैं सम्मानित

शेखर ने कहा कि प्रमोद भइया को 2019 में भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के द्वारा अर्जुन आवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है. हालांकि उस दिन खुशी से मां की आंखों में आंसू आ गया था. 2020 में मां देहांत हो गया था जिसके कारण आज मां हमारे बीच नहीं है.  आज मुझे अपने बड़े भाई का नाम लेते हुए गर्व महसूस हो रहा है. मेरे भइया ने न केवल ओडिशा का बल्कि दुनिया के सामने भारत का नाम ऊंचा किया है. भइया ने स्वर्ण पदक जीत कर इतिहास कायम किया है. इस जीत के बाद गांव से लेकर भुवनेश्वर के क्वाटर में जश्न का महौल बन चुका है. मुझे सभी रिश्ते-दारों का फोन कॉल आ रहा है. सभी लोग भइया की कामयाबी पर बधाई दे रहे हैं. इस खुशी के मौके पर मेरी आंखे नम हो चुकी है. हालांकि भइया ने भी पोडियम पर स्वर्ण पदक को मां-पापा को समर्पित किया है.

साथ ही साथ आखरी शब्दों ने शेखर ने कहा कि प्रमोद भइया का सपना था कि वह पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतने के बाद शादी करेंगे. अब उम्मीद है कि वह जल्द ही शादी कर लेगें. प्रमोद भगत ने पुरुषों की एकल बैडमिंटन SL3 स्पर्धा के फाइनल में ब्रिटेन के डेनियन बेथल को 2-0 से हराकर भारत को स्वर्ण पदक दिलाया है. जिसके बाद भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने प्रमोद भगत को शानदार जीत पर बधाई दी है.

 

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