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Tokyo Olympics: क्वालिफाई करने से चूकने पर भी मिला ओलंपिक का टिकट, पिता बोले- सोना लेकर लौटेगी बेटी

Meerut girl Annu Rani in Tokyo Olympics: किसान पिता अमरपाल सिंह बताते हैं कि वह डेढ़ लाख रुपये का भाला दिलाने में असमर्थ थे और कर्ज तक लेना पड़ा. जिसके बाद अन्नू ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के बाद एक कामयाबी हासिल की.

Meerut girl Annu Rani to represent India in Tokyo Olympics Meerut girl Annu Rani to represent India in Tokyo Olympics

Meerut girl Annu Rani to represent India in Tokyo Olympics: मेरठ की एक बेटी अब टोक्यो ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी. भाला फेंक चैंपियन अन्नू रानी वर्ल्ड एथलीट रैंकिंग सिस्टम के आधार पर ओलंपिक के लिए चयनित हुई हैं. अन्नू रानी को ओलंपिक का टिकट मिलने से उनके गांव बहादुरपुर में परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं है. मेरठ के बहादरपुर गांव की चकरोड से निकलकर अन्नू रानी अब टोक्यो ओलंपिक के लिए रवाना होंगी.

12 साल के खेल कॅरियर में आर्थिक समस्याओं को दरकिनार कर अन्नू ने अपने लाजवाब प्रदर्शन की बदौलत आखिरकार ओलंपिक का टिकट हासिल कर ही लिया. हालांकि वो ओलंपिक क्वालिफाई करने से चूक गई थीं लेकिन वर्ल्ड रैंकिंग के आधार पर उन्हें ओलंपिक में शामिल होने का मौका मिल ही गया.

मेरठ की बेटी के ओलंपिक में जाने की खबर से परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं है. अन्नू के किसान पिता कहते हैं कि बेटी जरूर पदक लेकर लौटेगी और देश का मान बढ़ाएगी.

आठ बार की राष्ट्रीय रिकॉर्ड होल्डर एथलीट किसान अमरपाल सिंह के घर 28 अगस्त 1992 को जन्मी अन्नू रानी पांच बहन-भाइयों में सबसे छोटी हैं. अमरपाल सिंह ने बताया कि उनका भतीजा लाल बहादुर व बेटा उपेंद्र अच्छे धावक रहे हैं. इन्हीं की प्रेरणा से अन्नू रानी ने खेल के मैदान पर कदम रखा. वह गांव की चकरोड और दबथुआ कॉलेज में अभ्यास करती थीं.

शुरुआत में भाला फेंक के साथ गोला फेंक और चक्का फेंक का भी अभ्यास करती थीं. लेकिन आखिरकार उन्होंने भाला फेंक को अपना भविष्य चुना. परिजन कहते हैं कि अन्नू ओलंपिक से सोने का तमगा लेकर ही लौटेगी.

किसान पिता अमरपाल सिंह बताते हैं कि वह डेढ़ लाख रुपये का भाला दिलाने में असमर्थ थे और कर्ज तक लेना पड़ा. जिसके बाद अन्नू ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के बाद एक कामयाबी हासिल की.

अन्नू रानी की खास उपलब्धियां...
> 2014 एशियाई गेम्स में कांस्य
> 2014 कामनवेल्थ गेम्स में प्रतिभागी रहीं
> 2015 में एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य
> 2017 में एशियाई चैंपियनशिप में रजत
> साथ ही वो वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में फाइनल में जगह पक्की करने वाली पहली भारतीय बनीं.

 

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